Bihar Exit Poll 2025: एनडीए की बंपर बढ़त, तेजस्वी पिछड़े- प्रशांत किशोर को लगा बड़ा झटका

 

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण की वोटिंग ख़त्म होते ही एग्ज़िट पोल के नतीजों ने सूबे की राजनीति में हलचल मचा दी है। शुरुआती रुझानों में एनडीए गठबंधन को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है, जबकि तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाला महागठबंधन पिछड़ता नजर आ रहा है। वहीं, चर्चित तीसरे मोर्चे जन सुराज पार्टी की स्थिति बेहद कमजोर दिख रही है। चुनावी मैदान में “बदलाव की राजनीति” के दावे के साथ उतरे प्रशांत किशोर के लिए ये नतीजे किसी झटके से कम नहीं हैं।

सर्वे एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार, जन सुराज पार्टी को 0 से 4 सीटों के बीच सीमित बताया गया है। कुछ सर्वे, जैसे पीपुल्स पल्स, ने उसे अधिकतम 5 सीटों तक का अनुमान दिया है। यानी दो साल की मेहनत और “जन संवाद यात्रा” के बावजूद पार्टी को जनता का वैसा जनसमर्थन नहीं मिल पाया, जिसकी उम्मीद प्रशांत किशोर ने जताई थी।

एनडीए के पक्ष में चली हवा, महिलाओं और युवाओं का झुकाव अहम

एनडीए को मिले शुरुआती रुझानों ने भाजपा-जेडीयू खेमे में उत्साह बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि नीतीश कुमार का प्रशासनिक अनुभव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता ने गठबंधन को स्थिरता और विकास की छवि दी है। सरकारी योजनाओं की जमीनी पहुंच, महिलाओं की भागीदारी और पिछड़े वर्गों का एकजुट रहना एनडीए की जीत का मुख्य आधार माना जा रहा है।

महागठबंधन का ग्राफ गिरा, भीड़ वोट में तब्दील नहीं हो पाई

2020 में जहां महागठबंधन ने 110 सीटों का आंकड़ा छुआ था, वहीं इस बार सर्वे उसे 90 के नीचे दिखा रहे हैं। तेजस्वी यादव ने बेरोज़गारी और सरकारी नौकरियों को लेकर मजबूत अभियान जरूर चलाया, लेकिन सर्वे के मुताबिक भावनात्मक अपील वोट में नहीं बदल पाई।
कई सीटों पर टिकट वितरण और संगठनात्मक कमजोरी से पार्टी को नुकसान हुआ है, जिसका सीधा फायदा एनडीए को मिला।

जन सुराज: जन संवाद से जन समर्थन तक की मुश्किल राह

प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने लगभग हर विधानसभा सीट पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन संगठन और संसाधन की कमी पार्टी को भारी पड़ गई। उनका मॉडल सैद्धांतिक रूप से आकर्षक था, परंतु ज़मीनी स्तर पर कार्यकर्ता वर्ग की मजबूती की कमी ने असर डाला। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि जन सुराज पार्टी को अभी बिहार की राजनीति में पैर जमाने में वक्त लगेगा।

एग्ज़िट पोल बनाम नतीजे – इतिहास गवाह है उलटफेर का

हालांकि जानकार यह भी मानते हैं कि एग्ज़िट पोल हमेशा सटीक नहीं होते। 2015 और 2020 के चुनावों में भी बिहार ने ऐसे कई उलटफेर देखे हैं।
अब नज़रें 14 नवंबर पर टिकी हैं, जब नतीजे घोषित होंगे और यह तय होगा कि जन सुराज का सपना हकीकत बन पाया या यह सिर्फ एक सियासी प्रयोग बनकर रह गया।