24 घंटे के लिए थमेगा दवा कारोबार: बिहार की 40 हजार मेडिकल दुकानें रहेंगी बंद, जानिए वजह
बिहार के 40 हजार मेडिकल स्टोर होंगे प्रभावित
बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अनुसार राज्य की लगभग 40 हजार दवा दुकानें इस बंद में शामिल होंगी। इनमें अकेले पटना जिले की करीब 7 हजार मेडिकल दुकानें शामिल हैं। वहीं संगठन का दावा है कि देशभर में करीब 12.5 लाख दवा दुकानें इस विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बनेंगी।
एसोसिएशन के अध्यक्ष परसन कुमार सिंह और महासचिव प्रभाकर कुमार ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि ऑनलाइन दवा कंपनियां भारी छूट और आक्रामक मार्केटिंग के जरिए पारंपरिक दवा व्यवसाय को नुकसान पहुंचा रही हैं। उनका कहना है कि दवा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सभी के लिए समान नियम लागू होने चाहिए।
ऑनलाइन दवा बिक्री पर उठाए गंभीर सवाल
केमिस्ट संगठनों ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दवाओं की बिक्री के दौरान कई तरह की अनियमितताएं देखने को मिल रही हैं। एक ही प्रिस्क्रिप्शन का बार-बार उपयोग, फर्जी पर्चियों पर दवाओं की बिक्री और एंटीबायोटिक व नारकोटिक दवाओं की आसान उपलब्धता को उन्होंने मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया।
संगठन का कहना है कि ई-कॉमर्स कंपनियों को नियमों में मिलने वाली छूट के कारण निगरानी कमजोर पड़ रही है, जिससे नकली या गलत तरीके से संग्रहित दवाओं के बाजार में आने की आशंका बढ़ रही है।
AI से बने फर्जी प्रिस्क्रिप्शन पर भी चिंता
केमिस्ट संगठनों ने यह भी दावा किया कि अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से तैयार किए गए फर्जी प्रिस्क्रिप्शन का इस्तेमाल कर दवाएं आसानी से खरीदी जा रही हैं। इससे मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
संगठन ने मांग की है कि जिन नियमों और मानकों का पालन पारंपरिक दवा दुकानदारों को करना पड़ता है, वही नियम ऑनलाइन दवा कंपनियों पर भी सख्ती से लागू किए जाएं। उनका कहना है कि बिना प्रभावी नियंत्रण के ऑनलाइन दवा बिक्री से एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस जैसी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।
लोगों से की गई खास अपील
बंद को देखते हुए केमिस्ट संगठनों ने आम लोगों से आवश्यक दवाओं की व्यवस्था पहले से कर लेने की अपील की है। हालांकि गंभीर मरीजों और आपातकालीन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कुछ चुनिंदा मेडिकल स्टोर खुले रहेंगे।
संगठनों का कहना है कि यह बंद केवल व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि दवाओं की गुणवत्ता, मरीजों की सुरक्षा और दवा बिक्री के क्षेत्र में समान नियमों की मांग को लेकर किया जा रहा है।
तकनीक और ई-कॉमर्स के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच दवा कारोबार को लेकर यह विरोध अब केवल व्यापार का मुद्दा नहीं रह गया है। केमिस्ट संगठनों का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों पर एक समान और सख्त नियम लागू करना समय की जरूरत है।