बिहार में बनेंगे 725 ग्रामीण हाट, जीविका दीदियों को मिलेगा सीधा बाजार; मंत्री श्रवण कुमार ने दिए जल्द प्रस्ताव भेजने के निर्देश

 

 

 

Bihar news: बिहार के ग्रामीण इलाकों में स्थानीय कारोबार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ी पहल की है। ग्रामीण विकास विभाग ने प्रदेश में 725 स्थानों को ग्रामीण हाट बाजार के लिए चिह्नित किया है। सोमवार को ग्रामीण विकास मंत्री सह सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार की अध्यक्षता में विभाग और नाबार्ड के बीच योजनाओं के अभिसरण को लेकर समीक्षा बैठक हुई। बैठक में ग्रामीण हाट के निर्माण और उससे जुड़ी योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई।

मंत्री श्रवण कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि चिन्हित स्थलों की समीक्षा पूरी कर सभी जिलों से प्रस्ताव जल्द नाबार्ड को भेजे जाएं, ताकि निर्माण कार्य शुरू करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। ग्रामीण हाट के लिए तीन मॉडल तय किए गए हैं, जिनमें 20 डिसमिल, 50 डिसमिल और एक एकड़ क्षेत्रफल वाले हाट शामिल हैं। पहले चरण में नाबार्ड की वित्तीय भागीदारी से 20 से 49 डिसमिल क्षेत्र में ग्रामीण हाट विकसित करने की योजना है।

मंत्री ने बताया कि फिलहाल अररिया, बांका, भागलपुर, कटिहार, मधेपुरा, सुपौल और समस्तीपुर से बड़े क्षेत्रफल वाले हाट के निर्माण के प्रस्ताव मिल चुके हैं। बाकी जिलों से भी प्रस्ताव तैयार कर जल्द भेजने का निर्देश दिया गया है। केंद्र स्तर पर ग्रामीण हाट के लिए अधिकतम 40 लाख रुपये की राशि प्रस्तावित है। राज्य सरकार की ओर से इस राशि को बढ़ाने का प्रस्ताव भी केंद्र को भेजा गया है।

जीविका दीदियों के उत्पादों को मिलेगा बाजार

श्रवण कुमार ने कहा कि ग्रामीण हाट के निर्माण से जीविका दीदियों और स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध होगा। स्थानीय स्तर पर तैयार सामान को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने में सुविधा होगी, जिससे ग्रामीण महिलाओं की आमदनी बढ़ाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। हाट में जीविका दीदियों के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।

बैठक में नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह ने ग्रामीण विकास विभाग के साथ मिलकर काम करने और जरूरत के अनुसार तकनीकी, वित्तीय व संस्थागत सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई। बैठक में ग्रामीण आजीविका, आधारभूत ढांचे, वित्तीय समावेशन, कौशल विकास, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमिता से जुड़ी योजनाओं की भी समीक्षा की गई।