परंपरा, विज्ञान और सौहार्द का संगम: बेसा के दही-चूड़ा आयोजन में जुटे सैकड़ों अभियंता
Bihar news: मकर संक्रांति के पावन अवसर पर बिहार अभियंत्रण सेवा संघ (बेसा) की ओर से इस वर्ष भी पारंपरिक दही-चूड़ा एवं खिचड़ी कार्यक्रम का आयोजन पूरे उत्साह और आत्मीय माहौल में किया गया। यह आयोजन बिहार अभियंता भवन, जय प्रकाश पथ, बोरिंग रोड, पटना में संपन्न हुआ, जिसमें विभिन्न विभागों से जुड़े सैकड़ों अभियंताओं की सहभागिता देखने को मिली।
कार्यक्रम की अगुवाई करते हुए बिहार अभियंत्रण सेवा संघ के अध्यक्ष ई. सुनील कुमार ने कहा कि मकर संक्रांति देश के हर कोने में अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाई जाती है, लेकिन इसका मूल भाव एक ही है सामाजिक समरसता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता। उन्होंने बताया कि बिहार और उत्तर प्रदेश में दही-चूड़ा की परंपरा सदियों पुरानी है, जो सादगी और सामूहिकता का प्रतीक है।
वहीं संघ के महासचिव ई. राकेश कुमार ने मकर संक्रांति के धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस दिन दही-चूड़ा, तिलकुट और खिचड़ी का सेवन शुभ माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, यह भोजन सौभाग्य, सकारात्मक ऊर्जा और आपसी रिश्तों में मजबूती लाता है। उन्होंने यह भी बताया कि दही-चूड़ा स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी है, क्योंकि चूड़ा में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत करता है और ठंड के मौसम में शरीर को संतुलित ऊर्जा देता है।
कार्यक्रम के दौरान अध्यक्ष और महासचिव ने सभी अभियंता साथियों का स्वागत करते हुए उन्हें मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं। आयोजन में संघ के उपाध्यक्ष ई. अंजनी कुमार, ई. मनोज कुमार, कार्यकारिणी सदस्य ई. राज किशोर प्रसाद, ई. दिव्या स्वर्णिम, ई. गौतम, ई. गौसन कुमार, ई. मनीष कुमार, ई. हंसा कुमारी, ई. सृष्टि सारिका सहित कई वरिष्ठ और पूर्व पदाधिकारी उपस्थित रहे।
इसके अलावा पूर्व अध्यक्ष ई. अजय कुमार सिन्हा, पूर्व महासचिव ई. रविन्द्र कुमार सिन्हा, ई. राजेश्वर मिश्रा, ई. आदित्य नारायण झा अनल, मुख्य अभियंता अनिल कुमार सिंह, विजय कुमार समेत बड़ी संख्या में अभियंताओं ने आयोजन में भाग लेकर इसे यादगार बनाया।
बेसा का यह आयोजन न केवल परंपरा के निर्वहन का उदाहरण बना, बल्कि अभियंता समुदाय के बीच आपसी संवाद, सौहार्द और एकजुटता को भी नई मजबूती देता नजर आया।