बिहार विधान परिषद् में स्पेस टेक्नोलॉजी पर खास व्याख्यान, इसरो वैज्ञानिकों ने बताया- आपदा से भीड़ प्रबंधन तक बदलेगा बिहार का सिस्टम

 
Bihar news: बिहार विधान परिषद् सभागार में मंगलवार को “अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और विकास की नई सीमा” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन परिषद् के सभापति अवधेश नारायण सिंह के आमंत्रण पर हुआ, जिसमें अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों ने तकनीक के नए उपयोगों पर विस्तार से जानकारी दी।

व्याख्यान में स्पेस एप्लीकेशन सेंटर, इसरो के निदेशक नीलेश एम. देसाई और वैज्ञानिक दीपक सिंह ने बताया कि अंतरिक्ष तकनीक अब केवल रॉकेट और उपग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण और पर्यावरण निगरानी जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी भूमिका निभा रही है।

उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव रखने वाले विक्रम साराभाई को याद करते हुए कहा कि देश के स्पेस मिशन को आगे बढ़ाने में सी. वी. रमण, सतीश धवन और ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का योगदान बेहद अहम रहा है। उद्देश्य प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि देशहित में तकनीक का उपयोग है।

कार्यक्रम में बताया गया कि बिहार में मौसम और आपदा से जुड़े पूर्वानुमान को मजबूत करने के लिए स्पेस डेटा का उपयोग किया जा रहा है। बाढ़, भूकंप, वज्रपात, लू और तूफान जैसी स्थितियों की पहले से चेतावनी देने पर काम चल रहा है। पश्चिम चंपारण और भागलपुर में डॉप्लर वेदर रडार भी स्थापित किए जा रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए तूफान और चक्रवात की आशंका 15 दिन पहले तक बताने की दिशा में भी प्रयास हो रहा है।

कार्यक्रम में उपसभापति प्रो. राम वचन राय, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, परिषद् सदस्य और कई अधिकारी मौजूद रहे। अंत में सभापति ने वैज्ञानिकों की टीम को धन्यवाद देते हुए कहा कि ऐसे ज्ञानवर्धक कार्यक्रम आगे भी आयोजित किए जाने चाहिए।