बांकीपुर उपचुनाव में NDA की हार पर आनंद मोहन का तंज, बोले- ‘तुम्हें तुम्हारा गुरूर मारेगा’
Bakipur: बांकीपुर उपचुनाव में एनडीए की हार के बाद पूर्व सांसद आनंद मोहन ने बिना किसी का नाम लिए सत्ता पक्ष पर निशाना साधा है। गया में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने हार के कारणों पर मंथन की जरूरत बताते हुए कहा कि सत्ता का अहंकार अक्सर हार की वजह बनता है।
आनंद मोहन ने शायराना अंदाज में कहा, “तू किसी और से न हारेगा, तुझको तेरा गुरूर मारेगा।” उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि सत्ता जब अहंकार में डूबती है तो जनता चुनाव के जरिए उसका जवाब देती है। बांकीपुर के नतीजे को एनडीए को गंभीरता से लेना चाहिए और हार के पीछे की वजहों पर विचार करना चाहिए।
‘चुनाव में हार की एक वजह नहीं होती’
पूर्व सांसद ने कहा कि किसी भी चुनाव के परिणाम के पीछे कई कारण होते हैं। राजनीति का उद्देश्य सिर्फ सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि जनता की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार जनता की समस्याओं से दूर होने लगे तो जनता अपने मत के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर करती है।
उन्होंने विपक्ष की भूमिका को भी लोकतंत्र के लिए जरूरी बताते हुए कहा कि विपक्ष को सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने और जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने का काम करना चाहिए।
शराबबंदी पर भी आनंद मोहन ने उठाए सवाल
बिहार में शराबबंदी को लेकर आनंद मोहन ने कहा कि इस नीति के पीछे की सोच अच्छी थी और इसे महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर लागू किया गया था। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि जमीनी स्तर पर शराबबंदी पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाई है।
उन्होंने कहा कि बिहार के आसपास के राज्यों में शराब उपलब्ध होने के कारण तस्करी और अवैध कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाना चुनौती बना हुआ है। उनके मुताबिक, शराबबंदी को प्रभावी बनाने के लिए व्यापक और समान नीति की जरूरत है।
राजस्व और आम जनता पर बोझ का भी जिक्र
आनंद मोहन ने शराबबंदी के आर्थिक प्रभाव का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इससे राज्य के राजस्व पर असर पड़ा है। उन्होंने आशंका जताई कि राजस्व की भरपाई के लिए सरकार को दूसरे स्रोतों पर निर्भर होना पड़ता है, जिसका असर आम लोगों, गरीबों और किसानों पर पड़ सकता है।
उन्होंने सरकार से इस नीति की समीक्षा करने की मांग करते हुए कहा कि किसी बड़े सामाजिक या आर्थिक असंतोष की स्थिति पैदा होने से पहले फैसला लेना जरूरी है। उन्होंने यहां तक कहा कि “कल कोई बगावत पर उतर आए, उससे पहले शराबबंदी को खत्म कर देना चाहिए।”
जातीय राजनीति पर भी साधा निशाना
पूर्व सांसद ने जातीय समीकरणों के आधार पर राजनीति करने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि केवल जातीय आंकड़ों के सहारे सत्ता हासिल करना विकास का रास्ता नहीं हो सकता। उनके मुताबिक, राजनीति का मूल उद्देश्य जनता की सेवा, विकास और प्रदेश का बेहतर भविष्य तैयार करना होना चाहिए।