आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिलेगी डिजिटल ताकत- 2 महीने में मोबाइल, बच्चों की सेहत पर खास फोकस
कार्यक्रम में मंत्री ने दिव्यांगता प्रोटोकॉल और दिव्यांगता जांच अनुसूची (DSS) का भी शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि यह एक सरल चेकलिस्ट होगी, जिससे 0-6 वर्ष के बच्चों में विकास से जुड़ी समस्याओं की शुरुआती पहचान की जा सकेगी। इसके जरिए मोटर स्किल, भाषा, संज्ञानात्मक क्षमता, सामाजिक व्यवहार, दृष्टि और श्रवण जैसी छह महत्वपूर्ण क्षेत्रों की निगरानी संभव होगी।
इस अवसर पर “हमारे बच्चे, हमारा परिवार” नाम से एक व्हाट्सएप कम्युनिटी चैनल भी लॉन्च किया गया, जिसके माध्यम से पोषण, देखभाल और प्रारंभिक शिक्षा से जुड़ी जानकारी सीधे अभिभावकों तक पहुंचेगी।
समाज कल्याण विभाग की सचिव बंदना प्रेयषी ने बताया कि पोषण पखवाड़ा-2026 के दौरान पूरे राज्य में 71 लाख से अधिक गतिविधियां आयोजित की गईं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी बिहार ने राष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन किया है।
कार्यक्रम के दौरान प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) के तहत 6 वर्ष पूर्ण कर चुके बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण पत्र भी वितरित किया गया। मंत्री ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों के पहले 6 साल उनके भविष्य की नींव होते हैं और इस दौरान सही पोषण और देखभाल बेहद जरूरी है।
सरकार का कहना है कि इन पहलों से न सिर्फ बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि आंगनबाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता भी बेहतर होगी।