बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती का बदलेगा सिस्टम: अब लिखित परीक्षा से होगा चयन, सिर्फ इंटरव्यू की परंपरा खत्म

    •    200 अंकों की चयन प्रक्रिया में 160 अंक लिखित परीक्षा और 40 अंक इंटरव्यू के
    •    NET और PhD धारकों को भी देनी होगी परीक्षा, BET दोबारा शुरू करने की तैयारी
 
Bihar News: बिहार के विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नई प्रस्तावित नियमावली के तहत अब केवल इंटरव्यू के आधार पर नियुक्ति नहीं होगी, बल्कि उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा भी देनी होगी। इससे वर्षों से चली आ रही सिर्फ साक्षात्कार आधारित भर्ती प्रणाली खत्म होने की संभावना है।

नई व्यवस्था के अनुसार सहायक प्राध्यापक पद के लिए कुल 200 अंकों की चयन प्रक्रिया तय की गई है। इसमें 160 अंकों की लिखित परीक्षा और 40 अंकों का इंटरव्यू शामिल होगा। यानी चयन प्रक्रिया में लगभग 80 प्रतिशत वेटेज लिखित परीक्षा को दिया जाएगा।

NET और PhD धारकों के लिए भी परीक्षा जरूरी

प्रस्तावित नियमों के अनुसार अब NET क्वालिफाइड और PhD डिग्री धारकों को भी लिखित परीक्षा से गुजरना होगा। हालांकि ये योग्यताएं उम्मीदवारों की पात्रता के रूप में मान्य रहेंगी, लेकिन इनके लिए अलग से अंक देने का प्रावधान नहीं रखा गया है।

BET को दोबारा शुरू करने की तैयारी

राज्य सरकार स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर देने के लिए Bihar Eligibility Test (BET) को भी दोबारा शुरू करने की योजना बना रही है। इससे बिहार के अभ्यर्थियों को राज्य के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षक बनने का ज्यादा मौका मिल सकता है।

कुलपतियों से मांगे गए सुझाव

नई नियमावली का मसौदा राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को भेज दिया गया है। उनसे दस दिनों के भीतर अपने सुझाव देने को कहा गया है। सभी कुलपतियों की सहमति मिलने के बाद इसे लागू किया जा सकता है।

उम्र सीमा और परीक्षा का स्वरूप

मसौदे के अनुसार असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए न्यूनतम आयु 23 वर्ष और अधिकतम आयु 45 वर्ष निर्धारित की गई है। लिखित परीक्षा वर्णनात्मक (डिस्क्रिप्टिव) होगी, जिससे अभ्यर्थियों के विषय ज्ञान और विश्लेषणात्मक क्षमता का आकलन किया जाएगा।

शिक्षकों की कमी दूर होने की उम्मीद

भर्ती प्रक्रिया बिहार स्टेट यूनिवर्सिटी सर्विस कमीशन के माध्यम से कराई जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि नई पारदर्शी प्रणाली से योग्य उम्मीदवारों को बेहतर अवसर मिलेगा और विश्वविद्यालयों में लंबे समय से खाली पड़े पदों पर नियुक्ति का रास्ता भी साफ होगा।

नई नियमावली लागू होने के बाद राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों की कमी दूर होने और उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की उम्मीद जताई जा रही है।