बिहार में चार महीने तक बालू खनन पर रोक, 15 जून से लागू हुआ प्रतिबंध; अवैध खनन पर सख्ती के निर्देश
राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) की शर्तों के तहत मानसून अवधि में सभी स्वीकृत बालू घाटों पर खनन गतिविधियां पूरी तरह बंद रहेंगी। इस दौरान नदियों से बालू निकालने की अनुमति नहीं होगी।
निर्माण कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए तैयार किया गया बफर स्टॉक
सरकार ने खनन बंदी के बावजूद निर्माण कार्यों में किसी तरह की बाधा न आए, इसके लिए पहले से तैयारी कर ली है। विभिन्न जिलों में लाखों क्यूबिक फीट बालू का बफर स्टॉक सुरक्षित रखा गया है। जरूरत के अनुसार इसी भंडारित बालू की आपूर्ति सरकारी एजेंसियों, ठेकेदारों और आम उपभोक्ताओं को की जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने से बाजार में बालू की कृत्रिम कमी या कीमतों में अचानक बढ़ोतरी की आशंका नहीं है।
अवैध खनन पर प्रशासन की रहेगी कड़ी नजर
मानसून के दौरान अवैध खनन और गैरकानूनी परिवहन को रोकने के लिए खान एवं भूतत्व विभाग ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को विशेष निर्देश जारी किए हैं। संबंधित क्षेत्रों में नियमित गश्त, छापेमारी और निगरानी बढ़ाने को कहा गया है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध के दौरान अवैध खनन या परिवहन में शामिल पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पर्यावरण संरक्षण के लिए हर साल लागू होता है प्रतिबंध
विशेषज्ञों के अनुसार मानसून के दौरान नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है, जिससे खनन कार्य जोखिमपूर्ण हो जाता है। साथ ही इससे नदी की पारिस्थितिकी और प्राकृतिक संतुलन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यही कारण है कि हर साल चार महीने के लिए बालू खनन पर रोक लगाई जाती है।
सरकार ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि कहीं अवैध खनन या बालू के गैरकानूनी परिवहन की जानकारी मिले तो इसकी सूचना तुरंत प्रशासन को दें, ताकि समय पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।