नेपाल में भोटेकोशी की बाढ़ ने मचाई भारी तबाही, 157 की मौत; सैकड़ों लापता, 133 भारतीय भी शामिल

 

Nepal Flood: नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में बुधवार को भोटेकोशी नदी में आई अचानक और बेहद तेज बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। पानी और मलबे की तेज धार ने कई बस्तियों, सड़कों, पुलों और अन्य ढांचों को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाल पुलिस के अनुसार अब तक 157 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। 

अचानक आई बाढ़ ने दिया संभलने तक का मौका नहीं

बाढ़ का असर खास तौर पर नेपाल के रासुवा और आसपास के इलाकों में देखने को मिला। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र में पानी का तेज बहाव आने के बाद कई जगहों पर सड़क और पुल क्षतिग्रस्त हो गए। बड़ी मात्रा में मलबा जमा होने से राहत और बचाव दलों के सामने भी मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और जलविद्युत परियोजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। 

133 भारतीय नागरिक भी लापता

इस आपदा ने भारत की चिंता भी बढ़ा दी है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक शामिल हैं। इनमें बड़ी संख्या कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर जा रहे यात्रियों की बताई जा रही है। अलग-अलग एजेंसियों की रिपोर्ट में लापता लोगों की संख्या अलग-अलग सामने आ रही है, इसलिए अंतिम आंकड़ा राहत एवं बचाव अभियान आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट होने की उम्मीद है। 

ग्लेशियर से जुड़े मलबे को माना जा रहा संभावित कारण

प्रारंभिक जांच में बाढ़ के पीछे हिमालयी क्षेत्र में हुए बर्फ और चट्टानों के बड़े पैमाने पर खिसकने की आशंका सामने आई है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के शुरुआती विश्लेषण में ग्लेशियल क्षेत्र से हुए आइस-रॉक लैंडस्लाइड को संभावित वजह बताया गया है। हालांकि, आपदा की पूरी वजह की वैज्ञानिक जांच अभी जारी है। 

भारत ने भेजी राहत सामग्री

नेपाल में आई इस भीषण आपदा के बीच भारत ने तत्काल सहायता पहुंचाई है। भारत ने करीब 10 टन मानवीय सहायता और जरूरी दवाइयां नेपाल भेजी हैं। राहत सामग्री में अस्थायी आश्रय, कंबल, स्वच्छता किट, सोलर लैंप और दवाइयां शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात कर हरसंभव मानवीय सहायता का भरोसा भी दिलाया है। 

राहत-बचाव अभियान जारी

नेपाल में सेना, पुलिस और अन्य बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार अभियान चला रहे हैं। लेकिन बाढ़ में पुलों और सड़कों के क्षतिग्रस्त होने के कारण कई इलाकों तक पहुंचना चुनौती बना हुआ है। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित परिवारों तक जरूरी राहत सामग्री पहुंचाना है। 

नेपाल की इस त्रासदी ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र में अचानक आने वाली बाढ़ और ग्लेशियर से जुड़ी आपदाओं के खतरे को सामने ला दिया है। मौतों और लापता लोगों का वास्तविक आंकड़ा राहत एवं बचाव अभियान पूरा होने के बाद और स्पष्ट हो सकेगा।