टीबी मुक्त बिहार की दिशा में बड़ा अभियान, 3.50 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग; करीब 4 लाख मरीज मिले
Patna: बिहार को टीबी मुक्त बनाने की मुहिम के बीच बुधवार को पटना स्थित बिहार लोक भवन में ‘टीबी मुक्त बिहार’ विषय पर उच्चस्तरीय विचार-विमर्श हुआ। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। स्वास्थ्य मंत्री निशांत समेत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, विशेषज्ञ, फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मी और टीबी से स्वस्थ हो चुके लोग भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
संगोष्ठी में टीबी की जल्द पहचान, समय पर जांच और इलाज के साथ मरीजों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर चर्चा हुई। इलाज बीच में छोड़ने वाले मरीजों की संख्या कम करने और जरूरत के मुताबिक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
बिहार में 3.50 करोड़ से ज्यादा लोगों की हुई स्क्रीनिंग
स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत बिहार में अब तक 3 करोड़ 50 लाख 61 हजार लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इस दौरान 3 लाख 97 हजार 409 टीबी मरीजों की पहचान हुई है और उनका इलाज चल रहा है।
उन्होंने कहा कि मरीजों के साथ-साथ उनके परिवारों को भी टीबी से बचाव और संक्रमण रोकने के तरीकों की जानकारी दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग का फोकस अब सिर्फ अस्पताल आने वाले मरीजों पर नहीं, बल्कि लोगों तक पहुंचकर बीमारी की पहचान करने पर है।
38 जिलों में टीबी केंद्र, 499 जगह मुफ्त एक्सरे
राज्य के सभी 38 जिलों में जिला टीबी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। मरीजों की मुफ्त एक्सरे जांच के लिए बिहार में 499 केंद्र काम कर रहे हैं।
दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने के लिए पटना और दरभंगा में राज्यस्तरीय टीबी दवा भंडार के अलावा सभी जिलों में जिला स्तर पर भी दवा स्टोर की व्यवस्था की गई है।
ड्रग रेजिस्टेंट टीबी के लिए छह बड़े केंद्र
ड्रग रेजिस्टेंट टीबी के मरीजों के इलाज के लिए पीएमसीएच, आईजीआईएमएस, एसकेएमसीएच, डीएमसीएच, जेएलएनएमसीएच और एएनएमएमसीएच में नोडल केंद्र बनाए गए हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि राज्य के दूसरे सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी ऐसे केंद्र विकसित करने की योजना है। वहीं पटना के अगमकुआं स्थित यक्ष्मा प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण केंद्र के साथ दरभंगा, भागलपुर और आईजीआईएमएस में टीबी जांच की सुविधाएं उपलब्ध हैं। पावापुरी में भी नया केंद्र तैयार किया जा रहा है।
मरीजों को हर महीने मिल रही 1000 रुपये की मदद
इलाज के दौरान मरीजों को पोषण संबंधी सहायता देने के लिए निक्षय पोषण योजना के तहत चिह्नित मरीजों को हर महीने 1,000 रुपये दिए जा रहे हैं।
इसके अलावा निक्षय मित्रों के सहयोग से अब तक करीब 66 हजार फूड बास्केट मरीजों तक पहुंचाए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने युवाओं और आम लोगों से निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों की मदद करने की अपील की।
इलाज बीच में न छोड़ें मरीज, जनभागीदारी पर जोर
संगोष्ठी में इस बात पर खास जोर दिया गया कि टीबी की दवा शुरू करने के बाद मरीज इलाज को बीच में न छोड़ें। स्वास्थ्य सेवाओं को मरीजों की जरूरत के मुताबिक बेहतर बनाने और उन्हें लगातार इलाज से जोड़े रखने पर चर्चा हुई।
मंत्री निशांत ने कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे और स्वास्थ्य विभाग पूरी तत्परता से काम करता रहेगा। उन्होंने युवाओं और आम नागरिकों से अभियान से जुड़ने की अपील की।
स्वास्थ्यकर्मियों और टीबी चैंपियनों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान टीबी उन्मूलन के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों और टीबी चैंपियनों को सम्मानित किया गया। टीबी से स्वस्थ हो चुके लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों ने भी अपने अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम के अंत में ‘निक्षय शपथ’ के जरिए टीबी मुक्त बिहार का संकल्प दोहराया गया। इस दौरान राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह, स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, माई भारत के युवा स्वयंसेवक और सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
राज्य स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर निशांत को बिहार का स्वास्थ्य मंत्री और कुमार रवि को स्वास्थ्य विभाग का सचिव दर्ज किया गया है।