पानी बचाने की बड़ी पहल: बिहार में ‘इंजेक्शन वेल’ से भरे जाएंगे सूखते एक्वीफर, जल संकट पर बड़ा प्लान तैयार
इस परियोजना के तहत जमीन के नीचे मौजूद गहरे जल भंडार (एक्वीफर) को कृत्रिम रूप से रिचार्ज किया जाएगा, जिससे सूखते जल स्रोतों को फिर से जीवित किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक खासतौर पर उन इलाकों में कारगर साबित होगी, जहां भू-जल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है।
इसी के साथ सरकार भू-जल के अनियंत्रित दोहन पर रोक लगाने के लिए भू-जल विनियमन नीति का प्रारूप भी तैयार कर रही है। इसका उद्देश्य जल के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना और भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखना है।
राज्य में पहले से चल रहा “जल-जीवन-हरियाली” अभियान भी इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है। इस अभियान के प्रभाव से भू-जल स्तर में सुधार देखने को मिला है। आंकड़ों के अनुसार, जहां साल 2017 में राज्य के 102 प्रखंड अर्ध-गंभीर, गंभीर और अतिदोहन की श्रेणी में थे, वहीं 2025 तक यह संख्या घटकर 64 रह गई है।
सरकार की यह नई पहल न सिर्फ जल संकट से निपटने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है, बल्कि यह भी संकेत दे रही है कि बिहार अब पारंपरिक उपायों से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीक के सहारे अपने भविष्य को सुरक्षित करने की राह पर है।