बिहार में पंचायत चुनाव पर बड़ा अपडेट! 2026 में चुनाव मुश्किल, 2027 तक टलने के आसार; परिसीमन से बदलेगा गांव की सरकार का पूरा गणित

 

Bihar news: बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर फिलहाल 2026 में मतदान होता नजर नहीं आ रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग ने अगले पंचायत चुनाव की तैयारियों के तहत परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में प्रशासनिक कवायद तेज कर दी है। पंचायतों और वार्डों की नई सीमाएं तय करने में ही छह महीने से अधिक समय लगने की संभावना है। इसके बाद आरक्षण रोस्टर, मतदाता सूची और मतदान केंद्रों से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। ऐसे में पंचायत चुनाव का कार्यक्रम 2027 तक खिसकने की संभावना जताई जा रही है।

पहले होगा पंचायतों और वार्डों का नया परिसीमन

आगामी पंचायत चुनाव से पहले राज्य में पंचायतों का स्वरूप नए सिरे से तय किया जाएगा। इसके लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों के साथ गांवों की भौगोलिक स्थिति और उपलब्ध नक्शों को आधार बनाया जाएगा। बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण किया जाएगा।

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सीईबी (CEB) ले-आउट मैप तैयार करने की प्रक्रिया भी इस कवायद का हिस्सा होगी। बड़ी आबादी या बदली भौगोलिक स्थिति वाले इलाकों में पंचायतों और वार्डों की सीमाएं बदल सकती हैं।

प्रारूप जारी होने के बाद जनता से मांगी जाएगी आपत्ति

परिसीमन का प्रारंभिक प्रारूप तैयार होने के बाद उसे सरकारी गजट में प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद आम लोगों को प्रस्तावित सीमाओं को लेकर सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराने का मौका मिलेगा।

प्राप्त आपत्तियों की जांच और जरूरी संशोधन के बाद पंचायतों की अंतिम सीमाओं को मंजूरी दी जाएगी। यही प्रक्रिया चुनाव की आगे की तैयारियों का आधार बनेगी।

परिसीमन के बाद आरक्षण भी बदलेगा

पंचायतों की नई सीमाएं तय होने के बाद आरक्षण रोस्टर तैयार किया जाएगा। अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) और महिलाओं के लिए सीटों का नया आरक्षण तय किया जाएगा।

इसका सीधा असर पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों पर पड़ेगा। जिस पंचायत या वार्ड में कोई उम्मीदवार पिछले चुनाव में दावेदारी कर रहा था, जरूरी नहीं कि परिसीमन और नए आरक्षण के बाद वही सीट उसके लिए उपलब्ध रहे।

नई वोटर लिस्ट और बूथ निर्धारण में भी लगेगा समय

परिसीमन और आरक्षण के बाद चुनावी तैयारी का एक और बड़ा चरण शुरू होगा। नई सीमाओं के आधार पर मतदाता सूची का पुनरीक्षण, मतदान केंद्रों का निर्धारण और अन्य चुनावी व्यवस्थाएं पूरी की जाएंगी।

इन प्रक्रियाओं में भी करीब छह महीने तक का समय लगने का अनुमान है। इस तरह परिसीमन से लेकर चुनावी तैयारियों के अंतिम चरण तक लगभग एक साल का समय लग सकता है।

नवंबर-दिसंबर 2026 में खत्म होगा मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल

बिहार में मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2026 में समाप्त होना है। वर्ष 2021 में राज्य में पंचायत चुनाव सितंबर से दिसंबर के बीच कराए गए थे।

हालांकि इस बार परिसीमन समेत कई जरूरी प्रक्रियाएं अभी बाकी हैं। ऐसे में मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने से पहले चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। उपलब्ध समय-सीमा और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को देखते हुए 2027 में पंचायत चुनाव कराए जाने की संभावना मजबूत होती दिख रही है।

जिलाधिकारियों की होगी अहम भूमिका

परिसीमन और चुनावी तैयारियों में जिलाधिकारियों यानी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। जिला स्तर पर पंचायत और वार्डों की सीमाओं से जुड़े प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्हें अंतिम रूप दिया जाएगा।

कुल मिलाकर, बिहार में अगला पंचायत चुनाव सिर्फ तारीखों के लिहाज से ही नहीं, बल्कि पंचायतों की सीमाओं, आरक्षण और चुनावी समीकरण के लिहाज से भी बड़ा बदलाव लेकर आ सकता है। अंतिम तस्वीर परिसीमन और उससे जुड़ी सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही साफ होगी।