RJD में बड़ा बवाल: टिकट नहीं मिलने पर फूट-फूटकर रोए शिवचंद्र राम, पार्टी के सभी पदों से दिया इस्तीफा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिवचंद्र राम भावुक हो गए। मीडिया से बातचीत करते हुए उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन का सबसे कठिन दौर देखा है। उनके अनुसार, हालिया घटनाक्रम ने उन्हें मानसिक रूप से काफी आहत किया है और वे कई दिनों से ठीक से सो भी नहीं पाए हैं।
पूर्व मंत्री ने कहा कि वह 1990 से पार्टी और उसके नेतृत्व के साथ मजबूती से जुड़े रहे हैं। सामाजिक न्याय की विचारधारा को जनता तक पहुंचाने के लिए उन्होंने लगातार काम किया और संगठन को मजबूत बनाने में अपनी भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व से उन्हें हमेशा सम्मान मिला, लेकिन हाल के फैसलों ने उन्हें गहरी पीड़ा पहुंचाई है।
शिवचंद्र राम ने आरोप लगाया कि उनके साथ हुए व्यवहार से केवल वे ही नहीं, बल्कि दलित, महादलित, अति पिछड़े और वंचित समाज के लाखों समर्थक भी खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि बिहार के विभिन्न जिलों से उनके समर्थक पटना पहुंचे हैं और पार्टी के निर्णय से निराश हैं।
उन्होंने कहा कि अब उनकी प्राथमिकता उन लोगों के सम्मान और आत्मविश्वास को फिर से मजबूत करना है, जो वर्षों से उनके साथ खड़े रहे हैं। बहुजन समाज के महापुरुषों के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वे समाज के कमजोर वर्गों की आवाज को और मजबूती से उठाने के लिए आगे भी संघर्ष जारी रखेंगे।
विधान परिषद चुनाव के बीच शिवचंद्र राम का यह इस्तीफा RJD के लिए बड़ा राजनीतिक और संगठनात्मक झटका माना जा रहा है। ऐसे समय में जब पार्टी चुनावी रणनीति को धार देने में जुटी है, वरिष्ठ नेता की नाराजगी और सार्वजनिक इस्तीफा पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति की ओर इशारा कर रहा है। अब राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि आने वाले दिनों में इसका असर पार्टी की आंतरिक राजनीति और चुनावी समीकरणों पर कितना पड़ता है।