लंबित ऑडिट आपत्तियों पर बिहार विधानसभा सख्त, वित्त विभाग बना नोडल एजेंसी; सभी विभागों को महीने के अंत तक कार्रवाई के निर्देश

 

Bihar News: बिहार विधानसभा में लंबित ऑडिट आपत्तियों और उपयोगिता प्रमाण-पत्रों (यूसी) के निष्पादन में तेजी लाने के लिए बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार की अध्यक्षता में आयोजित लोक लेखा समिति (PAC) की उच्चस्तरीय बैठक में वित्त विभाग को नोडल विभाग बनाने का निर्णय लिया गया, ताकि विभिन्न विभागों के लंबित मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जा सके।

मुख्य भवन स्थित वाचनालय में आयोजित बैठक में लोक लेखा समिति के सदस्यों, महालेखाकार (AG) कार्यालय के अधिकारियों और कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में शिक्षा, उच्च शिक्षा, समाज कल्याण, स्वास्थ्य, परिवहन, नगर विकास एवं आवास, ग्रामीण विकास, राजस्व एवं भूमि सुधार तथा वाणिज्य-कर विभाग से जुड़े लंबित मामलों की विस्तार से समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में दर्ज लंबित आपत्तियों और उपयोगिता प्रमाण-पत्रों पर भी चर्चा हुई। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेह प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए इन मामलों का समयबद्ध निष्पादन बेहद जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लंबित मामलों के कारणों की पहचान कर शीघ्र कार्रवाई की जाए।

बैठक में तय किया गया कि वित्त विभाग सभी संबंधित विभागों और महालेखाकार कार्यालय के साथ समन्वय स्थापित कर विभागवार समीक्षा करेगा और लंबित मामलों के निस्तारण के लिए कार्ययोजना तैयार करेगा। साथ ही लोक लेखा समिति की बैठकों से पहले वित्त विभाग संबंधित विभागों और AG कार्यालय के अधिकारियों के साथ समन्वय बैठक आयोजित करेगा, ताकि आपत्तियों का त्वरित समाधान हो सके।

निर्णय के अनुसार, बैठक में शामिल सभी नौ विभागों को इसी महीने के अंत तक वित्त विभाग और महालेखाकार कार्यालय के साथ बैठक कर लंबित कंडिकाओं के निष्पादन की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। अन्य विभाग भी वित्त विभाग की तैयार कार्ययोजना के अनुसार कार्रवाई करेंगे।

बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि लंबित उपयोगिता प्रमाण-पत्रों के मामलों की समीक्षा मुख्य सचिव के स्तर पर भी लगातार की जा रही है। वहीं, लोक लेखा समिति के सदस्यों ने विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और समयबद्ध कार्रवाई पर जोर दिया।

सरकार को उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था से लंबित ऑडिट आपत्तियों के निस्तारण में तेजी आएगी, वित्तीय अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण होगा और सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता एवं जवाबदेही और अधिक मजबूत होगी।