बिहार चुनावी माहौल: तेजस्वी यादव का नीतीश सरकार पर बड़ा हमला, तीन इंजीनियरों की संपत्ति पर उठाए सवाल

 

Patna: विधानसभा चुनाव से पहले बिहार की सियासत गरमा गई है। विपक्ष लगातार सरकार को घेरने में जुटा है। बीते दिन पटना में वोटर अधिकार यात्रा के समापन के दौरान राहुल गांधी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने जमकर शक्ति प्रदर्शन किया। वहीं आज तेजस्वी यादव ने एक बार फिर नीतीश सरकार पर करारा वार किया और भ्रष्टाचार के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया।

सुबह-सुबह ट्वीट कर साधा निशाना

तेजस्वी यादव ने मंगलवार सुबह ट्वीट कर नीतीश कुमार के करीबी मंत्री और उनके अधीन काम करने वाले तीन इंजीनियरों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि:
    •    एक इंजीनियर के पास 500 करोड़ की संपत्ति है और उसके घर से 13 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए।
    •    दूसरे इंजीनियर ने EOU की छापेमारी के दौरान 10 करोड़ रुपये जला दिए, इसके बावजूद कैश बरामद हुआ और उसके पास 100 करोड़ की संपत्ति पाई गई।
    •    तीसरे इंजीनियर की संपत्ति करीब 300 करोड़ रुपये बताई गई।

तेजस्वी ने लिखा, “ये सब नीतीश कुमार के खास मंत्री के अधीन कार्यरत हैं। सवाल है कि मुख्यमंत्री को इनकी पूरी जानकारी होते हुए भी वे कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे?”

“चरम पर है भ्रष्टाचार”

तेजस्वी ने आरोप लगाया कि बिहार में संस्थागत भ्रष्टाचार चरम पर है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल टेंडरिंग के नाम पर मंत्री मालामाल हो रहे हैं और मुख्यमंत्री उनके साथ बैठकर हिसाब-किताब करते हैं। “थाना और ब्लॉक स्तर पर व्याप्त घूसखोरी की गवाही 14 करोड़ बिहारी दे रहे हैं,” तेजस्वी ने लिखा।

“भ्रष्टाचार के भीष्म पितामह हैं नीतीश”

इससे पहले सोमवार को भी तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर हमला बोला था। उन्होंने सीएम को “नैतिक भ्रष्टाचार का भीष्म पितामह” बताया था। तेजस्वी ने कहा था कि जब इंजीनियरों के घर से 100 करोड़ रुपये मिल रहे हैं तो यह साफ है कि सरकार में भ्रष्टाचार किस हद तक फैला हुआ है।

उन्होंने नीतीश सरकार को “नकलची सरकार” भी करार दिया। तेजस्वी के मुताबिक, “हमने कहा पेंशन बढ़ाएंगे तो सरकार वही घोषणा करती है। हमने कहा फ्री बिजली देंगे तो सरकार कहती है कि हम भी देंगे। हमारे विजन की नकल तो कर सकती है, लेकिन खुद से कोई नई सोच नहीं ला सकती।”

चुनावी दौर में बढ़ी सियासी गर्मी

तेजस्वी यादव के इस हमले ने बिहार की सियासत को और गरमा दिया है। चुनावी मौसम में भ्रष्टाचार का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। अब देखना होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या रुख अपनाती है और आगे विपक्ष इसे किस तरह भुनाता है।