बिहार में दाखिल-खारिज पर सरकार सख्त: 120 दिन से लंबित मामलों को 15 दिन में निपटाने का अल्टीमेटम

 
Bihar news: बिहार में जमीन से जुड़े लंबित मामलों को लेकर सरकार अब एक्शन मोड में नजर आ रही है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप कुमार जैसवाल के निर्देश पर विभाग ने राज्यभर में दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के लंबित मामलों को लेकर सख्त कदम उठाया है।

विभाग के सचिव जय सिंह ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर साफ निर्देश दिया है कि 120 दिनों से ज्यादा समय से लंबित सभी मामलों का अगले 15 दिनों के भीतर हर हाल में निष्पादन किया जाए। सरकार के इस आदेश के बाद कई अंचल कार्यालयों में हड़कंप मच गया है।

समय सीमा तोड़ी तो मानी जाएगी लापरवाही

विभाग ने अपने निर्देश में याद दिलाया है कि दाखिल-खारिज मामलों के निपटारे की समय-सीमा पहले से तय है। नियमों के अनुसार: 
    •    अविवादित मामलों का निपटारा 35 दिनों में
    •    विवादित मामलों का निपटारा 75 दिनों के भीतर होना जरूरी है।

लेकिन विभागीय समीक्षा में सामने आया कि कई अंचलों में फाइलें 120 दिनों से भी अधिक समय से लंबित पड़ी हैं। विभाग ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना है।

अंचलवार सूची जारी, अधिकारियों की बढ़ी जवाबदेही

पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए विभाग ने उन अंचलों की सूची भी जिलों को भेजी है, जहां सबसे ज्यादा मामले लंबित हैं। जिलाधिकारियों को संबंधित अंचलाधिकारियों (CO) पर सख्त निगरानी रखने और तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।

सरकार का मानना है कि कई जगहों पर जानबूझकर या लापरवाही के कारण आम लोगों के आवेदन लंबित रखे जा रहे हैं।

अब जिला स्तर पर होगी लगातार मॉनिटरिंग

राजस्व विभाग ने साफ कर दिया है कि भविष्य में कोई भी दाखिल-खारिज मामला तय 75 दिन की सीमा से बाहर नहीं जाना चाहिए। इसके लिए जिलाधिकारियों को नियमित समीक्षा और सघन मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी दी गई है।

जनता को राहत देने की कोशिश

सरकार का कहना है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को अंचल कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने से राहत दिलाना और भ्रष्टाचार की संभावनाओं को कम करना है। माना जा रहा है कि 15 दिनों के इस विशेष अभियान के दौरान हजारों लंबित मामलों का निपटारा किया जा सकता है।