बिहार में 98.12 लाख के फर्जी वेतन भुगतान मामले में डीईओ और डीपीओ निलंबित
बिहार के भागलपुर में शिक्षा विभाग से जुड़े 98 लाख रुपये अधिक के फर्जी वेतन भुगतान मामले में दो वरिष्ठ अधिकारियों पर गाज गिरी है. जिला शिक्षा पदाधिकारी चंदन कुमार और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना शशि चंदन चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. शिक्षा विभाग के निदेशक (प्रशासन) विजय कुमार पाण्डेय ने दोनों अधिकारियों के निलंबन से संबंधित आदेश जारी किया है. मामला एचआरएमएस पोर्टल के माध्यम से सुल्तानगंज प्रखंड में तनुश्री नाम की फर्जी विशिष्ट शिक्षिका के नाम पर वेतन भुगतान से जुड़ा है. विभागीय आदेश के मुताबिक इस प्रक्रिया के जरिए कुल 98 लाख 12 हजार 773 रुपये का अवैध भुगतान किए जाने का मामला सामने आया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है.
भागलपुर डीएम के आदेश पर जांच की गई, जिसमें गड़बड़ी का खुलासा हुआ. 9 अक्टूबर 2026 को जो रिपोर्ट सौंपी गई, उसमें ये बात सामने आई कि डीईओ कार्यालय से सुल्तानगंज प्रखंड की फर्जी शिक्षिका तनुश्री के नाम पर 98,12,773 रुपये का अवैध भुगतान हुआ है. जिसके बाद जोगसर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई. फर्जी शिक्षक के नाम पर फर्जीवाड़ा का खुलासा होने के बाद डीईओ चंदन कुमार और डीपीओ स्थापना शशि चंदन चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. निलंबित अवधि में डीईओ का मुख्यालय पूर्णिया और डीपीओ का मुख्यालय दरभंगा रहेगा.
असल में भागलपुर शिक्षा विभाग में 98.12 लाख रुपये के वित्तीय गड़बड़ी की शिकायत के बाद जांच में ये पाया गया कि मई 2025 से जुलाई 2026 के बीच सुल्तानगंज की एक फर्जी विशिष्ट शिक्षिका (तनु श्री) के नाम पर फर्जी प्रान (PRAN) और बैंक खाता तैयार किया गया. इसके बाद HRMS पोर्टल का दुरुपयोग कर अनाधिकृत रूप से कमरे का किराया भत्ता और डेटा में बदलाव कर वेतन की निकासी की गई. अब इस मामले में कार्रवाई हुई है.
दरअसल, पिछले दिनों डिप्टी सीएम सह वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने भी बताया था कि एजी रिपोर्ट में ये बात सामने आई है कि भागलपुर, पटना, औरंगाबाद, सुपौल, बांका और समस्तीपुर समेत कई जिलों में गलत ढंग से वेतन भुगतान हुआ है. ऐसे में राज्य के 9 लाख शिक्षाकर्मियों के वेतन भुगतान पर फिलहाल रोक लगा दी गई है. गहन जांच के आदेश दिए गए हैं.