बिहार की आंगनबाड़ी व्यवस्था होगी हाईटेक: बच्चों को दूध-अंडा, स्मार्ट सुविधाएं और नए भवनों पर सरकार का बड़ा फोकस
बैठक में बताया गया कि बिहार में फिलहाल 1,15,064 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जहां बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरी बालिकाओं को पोषण, स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और स्कूल पूर्व शिक्षा जैसी सेवाएं दी जा रही हैं।
‘सक्षम आंगनबाड़ी’ बनाने की तैयारी
सरकार अब आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने पर तेजी से काम कर रही है। इसके तहत पोषण वाटिका, स्वच्छ पेयजल, बाला पेंटिंग, ECCE लर्निंग मटेरियल, LED सुविधा और वर्षा जल संचयन जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं।
साथ ही सभी केंद्रों को LPG सुविधा से जोड़कर धुआं मुक्त बनाया गया है। बच्चों को सप्ताह में दो दिन सुधा दूध और अंडा या मूंगफली उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी लागू है।
पोषण अभियान में बिहार बना देश का नंबर-1
बैठक के दौरान अधिकारियों ने जानकारी दी कि “राष्ट्रीय पोषण माह 2025” और “राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा 2026” के सफल आयोजन में बिहार ने पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है।
इसके अलावा “आधारशिला”, “नवचेतना” और किशोरी बालिका योजना (SAG) के जरिए बच्चों की शुरुआती शिक्षा और किशोरियों के कौशल विकास पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
किराये के भवनों से सरकारी परिसरों में होंगे केंद्र शिफ्ट
मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अगले एक वर्ष के भीतर आंगनबाड़ी भवन निर्माण के लक्ष्य को हर हाल में पूरा किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि किराये के भवनों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों को अधिक से अधिक सरकारी भवनों और स्कूल परिसरों में स्थानांतरित किया जाए, ताकि लाभार्थियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
सेविका-सहायिका के मानदेय पर भी जोर
बैठक में आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका के मानदेय भुगतान में तेजी लाने के निर्देश भी दिए गए। विभाग के अधिकारियों को लंबित मामलों का जल्द निपटारा करने और योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
बैठक के बाद मंत्री और विभाग के अपर मुख्य सचिव ने ICDS निदेशालय का दौरा कर विभिन्न शाखाओं के कामकाज की समीक्षा की और योजनाओं के प्रभावी संचालन के लिए जरूरी दिशा-निर्देश दिए।