5 साल में बदलेगा बिहार का हेल्थ मैप: गांव के CHC से सदर अस्पताल तक मिलेगा सुपर स्पेशियलिटी इलाज
गांव-प्रखंड स्तर पर मिलेंगी विशेषज्ञ सेवाएं
स्वास्थ्य विभाग की योजना के मुताबिक 2025 से 2030 के बीच सभी प्रखंड स्तरीय CHC और जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों, उन्नत जांच सुविधाओं और जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
अपग्रेड होने वाले CHC में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, डाइटिशियन, डेंटल सर्जन, आयुष विशेषज्ञ, फिजिशियन, फार्मासिस्ट, यूरोलॉजिस्ट, ECG टेक्निशियन, डेंटल और ओटी असिस्टेंट की तैनाती की जाएगी। इससे सामान्य इलाज से आगे बढ़कर विशेषज्ञ परामर्श और जांच की सुविधा स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध होगी।
जिला अस्पताल बनेंगे सुपर स्पेशियलिटी हब
जिला अस्पतालों में एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, न्यूरो फिजिशियन, कार्डियोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट और नेफ्रोलॉजिस्ट जैसे विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाएगी। इसके साथ ही हर जिला अस्पताल में डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (DEIC) की स्थापना होगी, जहां जन्म से छह वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात बीमारियों की पहचान और इलाज की समुचित व्यवस्था रहेगी।
पटना से होगी निगरानी
सभी DEIC को पटना स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) से जोड़ा जाएगा। यहां से इलाज की गुणवत्ता, सुविधाओं और सेवाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। COE में स्वास्थ्य विशेषज्ञ, फार्मासिस्ट और तकनीकी टीम तैनात रहेगी, जो बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में प्रशिक्षण, शोध और मार्गदर्शन का काम करेगी।
सरकार का दावा है कि इस योजना के लागू होने के बाद ग्रामीण और छोटे शहरों के मरीजों को बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। अगर यह ब्लूप्रिंट तय समयसीमा में जमीन पर उतरता है, तो आने वाले पांच वर्षों में बिहार का हेल्थ सिस्टम एक नई पहचान के साथ सामने आ सकता है।