बिहार की PVCS समितियां बनेंगी बहुउद्देशीय, किसानों को एक ही मंच पर मिलेंगी ऋण, विपणन और बैंकिंग सेवाएं
Patna News: बिहार सरकार ने राज्य की प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समितियों (PVCS) को अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देश पर अब राज्य की सभी पीवीसीएस समितियों की उपविधियों में बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋण समिति (M-PACS) से जुड़े प्रावधान शामिल किए जाएंगे। इससे ये समितियां केवल सब्जी उत्पादन और विपणन तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि किसानों को वित्तीय, कृषि और विभिन्न सामाजिक सेवाएं भी उपलब्ध करा सकेंगी।
सहकारिता विभाग के अनुसार, राज्य की सभी पीवीसीएस समितियों को बैंकों से जोड़ने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। उपविधियों में संशोधन के बाद समितियां अपने सदस्यों को अल्पकालीन और दीर्घकालीन ऋण उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्नत बीज, उर्वरक, सिंचाई सुविधाएं और कृषि यंत्रों की व्यवस्था भी सुनिश्चित करेंगी।
इसके अलावा, कृषि उत्पादों के संग्रहण, भंडारण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन जैसी सेवाएं भी समितियों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का लक्ष्य किसानों को उत्पादन से लेकर बाजार तक हर स्तर पर सहयोग प्रदान करना है।
नई व्यवस्था के तहत पीवीसीएस समितियां मत्स्य पालन, डेयरी, मुर्गी पालन, बकरी पालन और मधुमक्खी पालन जैसी आयवर्धक गतिविधियों को भी बढ़ावा देंगी। साथ ही ये समितियां सहकारी बैंकों के बैंक मित्र के रूप में कार्य करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि राज्य सरकार सहकारिता क्षेत्र को बहुआयामी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पीवीसीएस में एम-पैक्स के प्रावधान जुड़ने से किसानों को एक ही मंच पर ऋण, कृषि निवेश, विपणन और अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध होंगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
सरकार का मानना है कि इस पहल से ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को भी सहकारिता आधारित आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का अवसर मिलेगा। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और कॉमन सर्विस सेंटर जैसी सेवाओं के माध्यम से समितियां ग्रामीण विकास का नया मॉडल बनकर उभरेंगी।
सहकारिता विभाग की यह पहल राज्य में सहकारी संस्थाओं को आधुनिक, आत्मनिर्भर और बहुउद्देशीय बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है, जिससे किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।