बराहना महिला कॉलेज की नियुक्तियों पर घमासान, परिवारवाद और अनियमितता के आरोपों से बढ़ा विवाद
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि कॉलेज में बहाली प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से नहीं की गई और योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी कर करीबी लोगों एवं रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि नियुक्तियों में नियमों की बजाय प्रभाव और पहुंच को प्राथमिकता दी गई।
रिश्तेदारों को पद देने का आरोप
किशोर कुणाल ने दावा किया कि मंत्री के करीबी लोगों को कॉलेज में अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। उनके मुताबिक विधायक के पूर्व निजी सहायक रहे अरुण प्रसाद को कॉलेज का सचिव बनाया गया, जबकि मंत्री परिवार से जुड़े अन्य लोगों को प्रोफेसर समेत कई पदों पर नियुक्ति दी गई।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या अब शैक्षणिक संस्थानों में योग्यता की जगह रिश्तेदारी और राजनीतिक प्रभाव को महत्व दिया जा रहा है। साथ ही यह भी कहा कि कॉलेज के पूर्व प्रबंधन के समय इस तरह के आरोप सामने नहीं आए थे।
प्राचार्य पर भी उठे सवाल
प्रेस वार्ता में कॉलेज के प्राचार्य दिनेश कुमार मिश्रा पर भी निशाना साधा गया। आरोप लगाया गया कि उन्होंने अपने बेटे दीपक कुमार को भंडारपाल और दामाद अजीत कुमार तिवारी को कार्यालय लिपिक के पद पर नियुक्त कराया।
इसके अलावा रोहतास जिले के कई लोगों को नौकरी देने पर भी सवाल उठाए गए। आरोप है कि स्थानीय शिक्षित युवाओं की अनदेखी कर बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी गई।
अनुदान राशि में लेन-देन का आरोप
किशोर कुणाल ने यह भी आरोप लगाया कि कॉलेज में नियुक्तियों और अनुदान राशि जारी करने के नाम पर कथित आर्थिक लेन-देन किया गया। उन्होंने दावा किया कि एक सेवानिवृत्त प्राध्यापक ने अनुदान राशि जारी करने के बदले पैसे मांगने का आरोप लगाते हुए थाना में आवेदन भी दिया है।
जांच नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
पूर्व प्रत्याशी ने कॉलेज की सभी नियुक्तियों की उच्चस्तरीय जांच कराने, चयन प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो मामला विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षा विभाग और राज्यपाल तक ले जाया जाएगा।
प्रेस वार्ता में कई स्थानीय नेता और समर्थक भी मौजूद रहे। फिलहाल कॉलेज प्रशासन या संबंधित पक्ष की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।