बिहार पुलिस में DSP बने क्रिकेटर आकाश दीप और मुकेश कुमार, सरकार ने रखी 5 साल तक खेलते रहने की शर्त
Bihar news: बिहार सरकार ने राज्य की खेल नीति के तहत भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज आकाश दीप और मुकेश कुमार को बड़ी सौगात दी है। दोनों अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को बिहार पुलिस में पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के पद पर सीधी नियुक्ति दी गई है। यह नियुक्ति राज्य सरकार की ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के अंतर्गत की गई है। हालांकि, इस नियुक्ति के साथ सरकार ने एक महत्वपूर्ण शर्त भी जोड़ी है।
5 साल तक क्रिकेट खेलना होगा अनिवार्य
गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, दोनों खिलाड़ियों को अगले पांच वर्षों तक सक्रिय क्रिकेटर के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते रहना होगा। इसके लिए दोनों से अनिवार्य रूप से बॉन्ड भी भरवाया जाएगा।
सरकार का कहना है कि इस शर्त का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खिलाड़ी सरकारी नौकरी मिलने के बाद भी खेल से जुड़े रहें और देश व राज्य का नाम रोशन करते रहें।
शर्त तोड़ी तो नौकरी पर पड़ेगा असर
अधिसूचना में साफ किया गया है कि यदि खिलाड़ी पांच वर्षीय बॉन्ड की शर्तों का पालन नहीं करते हैं, तो उनकी नियुक्ति का पुष्टीकरण (Confirmation) नहीं किया जाएगा। यानी नियमों का उल्लंघन करने पर उनकी सरकारी नौकरी भी प्रभावित हो सकती है।
दस्तावेज सत्यापन के बाद होगी ज्वाइनिंग
दोनों खिलाड़ियों को पदभार ग्रहण करने से पहले अपने शैक्षणिक प्रमाणपत्र, खेल उपलब्धियों के मूल दस्तावेज, स्वास्थ्य प्रमाणपत्र, चरित्र प्रमाणपत्र और बॉन्ड से जुड़े सभी आवश्यक कागजात जमा करने होंगे। दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन के बाद उन्हें पटना स्थित बिहार पुलिस मुख्यालय में औपचारिक रूप से योगदान कराया जाएगा।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
रोहतास के रहने वाले आकाश दीप ने भारतीय टेस्ट टीम में अपनी तेज गेंदबाजी से खास पहचान बनाई है। वहीं, गोपालगंज के मुकेश कुमार टेस्ट, वनडे और टी-20 तीनों प्रारूपों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने वाले दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धियों को देखते हुए राज्य सरकार ने उन्हें यह सम्मान दिया है।
युवा खिलाड़ियों के लिए बनेगा प्रेरणा स्रोत
सरकार का मानना है कि आकाश दीप और मुकेश कुमार की डीएसपी पद पर नियुक्ति बिहार के उभरते खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। इससे खेल संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा और युवा खिलाड़ियों में यह विश्वास मजबूत होगा कि उत्कृष्ट प्रदर्शन के दम पर खेल के साथ-साथ सम्मानजनक सरकारी सेवा का अवसर भी हासिल किया जा सकता है।