जल-जीवन-हरियाली दिवस पर मत्स्य विभाग का विशेष कार्यक्रम, निजी जमीन पर नए जलस्रोत बनाने पर जोर

 
Bihar news: जल-जीवन-हरियाली दिवस के मौके पर डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मत्स्य प्रभाग की ओर से पटना स्थित विभागीय सभागार में एक अहम कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान “नए जलस्रोतों का सृजन – निजी भूमि पर चौर विकास” विषय पर परिचर्चा हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने की। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई।

अपने संबोधन में सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने कहा कि जल-जीवन-हरियाली योजना राज्य सरकार की सबसे महत्वपूर्ण और दूरदर्शी योजनाओं में से एक है। यह योजना जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और हरियाली बढ़ाने के लक्ष्य के साथ शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि आज जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया के लिए बड़ी चुनौती है और बिहार इस दिशा में गंभीरता से काम कर रहा है। निजी भूमि पर चौर विकास के जरिए नए जलस्रोत बनाना इस मिशन का अहम हिस्सा है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस योजना को जमीनी स्तर पर और प्रभावी तरीके से लागू किया जाए, ताकि जल संरक्षण के साथ-साथ लोगों की आय भी बढ़ सके।

कार्यक्रम में मौजूद मत्स्य निदेशक तुषार सिंगला ने बताया कि जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत तालाबों और जलकरों का जीर्णोद्धार कर मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे न सिर्फ ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है, बल्कि पानी की गुणवत्ता में भी सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि अभियान को सफल बनाने के लिए गांव-गांव तक जागरूकता फैलाना जरूरी है।

संयुक्त मत्स्य निदेशक दिलीप कुमार सिंह ने बताया कि बिहार आर्द्रभूमि से समृद्ध राज्य है। यहां करीब 9.41 लाख हेक्टेयर चौर और वेटलैंड क्षेत्र मौजूद है। निजी चौर भूमि को समेकित जलकृषि से जोड़कर मत्स्य, कृषि और बागवानी उत्पादन बढ़ाया जाएगा। आने वाले पांच वर्षों में इस योजना से 30 हजार हेक्टेयर जलक्षेत्र का विकास, एक लाख टन से ज्यादा उत्पादन, 50 हजार से अधिक लोगों को लाभ और 60 हजार नए रोजगार मिलने की संभावना है।

कार्यक्रम में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, जल-जीवन-हरियाली मिशन और अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। सभी जिलों के जिला मत्स्य पदाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम से जुड़े।

कार्यक्रम के अंत में यह संकल्प लिया गया कि बिहार को हरित, स्वच्छ और जल-समृद्ध बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से मिलकर मुकाबला किया जाएगा।