बिहार के सरकारी अस्पतालों में अब डिजिटल निगरानी, डॉक्टरों-कर्मियों पर सख्त होगी जवाबदेही
नई व्यवस्था के तहत सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य कर दी गई है। विभाग का मानना है कि इससे ड्यूटी में पारदर्शिता आएगी और अनुपस्थित रहने या हाजिरी में गड़बड़ी की शिकायतों पर रोक लगेगी। अब सभी कर्मियों को तय रोस्टर के अनुसार ही उपस्थिति दर्ज करनी होगी।
प्राइवेट प्रैक्टिस और रेफर सिस्टम पर भी सख्ती
सूत्रों के अनुसार 11 अप्रैल को सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने के फैसले के बाद स्वास्थ्य विभाग अब दूसरी बड़ी कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ चुका है। विभाग ने संकेत दिए हैं कि मरीजों को बिना वजह दूसरे अस्पतालों में रेफर करने की प्रवृत्ति पर भी सख्ती की जाएगी।
सरकार चाहती है कि मरीजों को सरकारी अस्पतालों में ही जांच और इलाज की पूरी सुविधा मिले, ताकि उन्हें बार-बार दूसरे अस्पतालों के चक्कर न लगाने पड़ें। इसके लिए सभी अस्पतालों को मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है।
डिजिटल हेल्थ गवर्नेंस पर सरकार का फोकस
राज्य सरकार अब स्वास्थ्य सेवाओं को टेक्नोलॉजी आधारित बनाने पर जोर दे रही है। योजना के तहत मरीजों का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज किया जाएगा, जिससे इलाज और जांच प्रक्रिया की निगरानी आसान हो सके।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इलाज व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही, भ्रष्टाचार या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अस्पतालों में नियमित मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय करने पर विशेष जोर दिया है।
नाइट ड्यूटी पर भी रहेगी नजर
नई व्यवस्था के तहत नाइट शिफ्ट में तैनात डॉक्टरों और कर्मचारियों को भी सुबह अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी। सरकार का उद्देश्य इमरजेंसी सेवाओं को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाना है।
प्रशासनिक बदलावों के बीच उठाया गया यह कदम बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। अब अस्पतालों में सिर्फ सियासत नहीं, बल्कि सिस्टम और डिजिटल मॉनिटरिंग की भूमिका ज्यादा दिखाई देगी।