मंत्री और पूर्व PA के बीच सोशल मीडिया अकाउंट को लेकर विवाद, साइबर थाने पहुंचा मामला
 

 
Bihar news: बिहार सरकार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी और उनके पूर्व निजी सहायक के बीच सोशल मीडिया अकाउंट के नियंत्रण को लेकर विवाद सामने आया है। मामला अब साइबर पुलिस के पास पहुंच गया है और इसकी जांच शुरू कर दी गई है।

मंत्री की ओर से पटना साइबर थाने में दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उनके पूर्व निजी सहायक निशांत केतु झा के पास अब भी उनके आधिकारिक X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट का एक्सेस मौजूद है। शिकायत के अनुसार, नौकरी छोड़ने के बाद भी अकाउंट का नियंत्रण वापस नहीं सौंपा गया, जिससे आधिकारिक कार्यों में परेशानी उत्पन्न हो रही है।

मंत्री कार्यालय का कहना है कि कई बार आग्रह किए जाने के बावजूद अकाउंट का एक्सेस वापस नहीं दिया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अकाउंट का नियंत्रण छोड़ने के बदले आर्थिक मांग की गई है। इस कारण पूरे मामले को साइबर अपराध से जुड़ा गंभीर विषय मानते हुए पुलिस से हस्तक्षेप की मांग की गई है।

दूसरी ओर, पूर्व निजी सहायक निशांत केतु झा ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि संबंधित X अकाउंट उनके व्यक्तिगत ई-मेल आईडी के माध्यम से बनाया गया था। उन्होंने दावा किया कि उन पर निजी ई-मेल का एक्सेस साझा करने का दबाव बनाया जा रहा है, जबकि अकाउंट की तकनीकी सेटिंग्स को निर्धारित प्रक्रिया के तहत बदला जा सकता है।

निशांत केतु झा ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी किसी प्रकार की धनराशि की मांग नहीं की और न ही अकाउंट को लेकर किसी तरह का दबाव बनाया है। उनके अनुसार, विवाद को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पटना साइबर थाना जांच में जुट गया है। साइबर डीएसपी Nitish Chandra Dharia ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि पूरे प्रकरण की तकनीकी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अकाउंट का वास्तविक नियंत्रण किसके पास है और शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

जांच एजेंसियां डिजिटल रिकॉर्ड, लॉगिन डिटेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।

सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के दौर में यह मामला सरकारी पदाधिकारियों के आधिकारिक डिजिटल अकाउंट्स के स्वामित्व और प्रबंधन को लेकर नई बहस छेड़ रहा है। फिलहाल राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस विवाद की चर्चा तेज है और सभी की नजरें साइबर जांच के निष्कर्ष पर टिकी हैं।