पढ़ाई के साथ कमाई! बिहार में शुरू होगा नया डिग्री प्रोग्राम, छात्रों को हर महीने मिलेंगे ₹12,300
इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर राजभवन में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें कार्यक्रम के क्रियान्वयन और पाठ्यक्रम की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों का मानना है कि यह पहल बिहार के युवाओं को डिग्री के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराएगी।
चार वर्षीय इस विशेष स्नातक कार्यक्रम को आधुनिक उद्योगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। पाठ्यक्रम का 75 प्रतिशत हिस्सा शैक्षणिक अध्ययन पर आधारित होगा, जबकि 25 प्रतिशत हिस्सा कौशल विकास और औद्योगिक प्रशिक्षण को समर्पित रहेगा। सबसे खास बात यह है कि तीसरे वर्ष में छात्रों को विभिन्न कंपनियों और उद्योगों में अप्रेंटिसशिप करना अनिवार्य होगा।
अप्रेंटिसशिप के दौरान छात्रों को आर्थिक सहायता भी दी जाएगी। इसके तहत चयनित विद्यार्थियों को हर महीने 12,300 रुपये तक का स्टाइपेंड मिल सकेगा। यह व्यवस्था भारत सरकार के अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण तंत्र के सहयोग से संचालित की जाएगी, जिससे छात्रों को पढ़ाई के साथ आर्थिक संबल भी मिलेगा।
शुरुआती चरण में बिहार के चार विश्वविद्यालयों और उनसे जुड़े 13 कॉलेजों में इस कार्यक्रम को लागू किया जाएगा। इसके तहत पारंपरिक विषयों के अलावा रोजगारोन्मुखी और आधुनिक पाठ्यक्रमों को भी शामिल किया गया है। छात्र बी.कॉम और बी.एससी के साथ-साथ कंटेंट एंड क्रिएटिव राइटिंग, डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स और हेल्थकेयर मैनेजमेंट जैसे नए क्षेत्रों में भी डिग्री हासिल कर सकेंगे।
यह कार्यक्रम नई शिक्षा नीति (NEP-2020) और यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार किया गया है। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे राज्य में उच्च शिक्षा में नामांकन दर बढ़ेगी और छात्रों को कॉलेज से निकलते ही रोजगार के लिए तैयार किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह मॉडल बिहार के युवाओं को सिर्फ डिग्रीधारी नहीं, बल्कि उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित और आत्मनिर्भर पेशेवर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।