शिक्षकों को सचिवालय बुलाकर सुनेंगे समस्याएं : शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी का बड़ा ऐलान, एक सप्ताह में होगी विशेष बैठक
शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह बैठक केवल औपचारिकता नहीं होगी, बल्कि इसमें शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। शिक्षकों और अधिकारियों के बीच सीधे संवाद की व्यवस्था की जाएगी, ताकि समस्याओं को पारदर्शी तरीके से समझा और सुलझाया जा सके।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि जो भी मांगें नियमों और व्यवस्था के अनुरूप होंगी, उन पर तत्काल निर्णय लेने का प्रयास किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि शिक्षकों को अपनी समस्याओं के लिए बार-बार आंदोलन या संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़े।
अपने संबोधन में मिथिलेश तिवारी ने शिक्षकों की भूमिका को राष्ट्र निर्माण का आधार बताते हुए कहा कि शिक्षक एक मोमबत्ती की तरह होते हैं, जो स्वयं जलकर समाज को रोशनी प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के योगदान से ही नई पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित और मजबूत बनता है।
शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि शिक्षकों का स्थान सड़कों पर आंदोलन करना नहीं, बल्कि विद्यालयों में ज्ञान की ज्योति जलाना है। सरकार की कोशिश है कि उनकी जायज समस्याओं का समाधान सम्मानजनक तरीके से हो, ताकि वे पूरी ऊर्जा के साथ शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दे सकें।
उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे समाज के अंतिम पायदान पर खड़े बच्चों और ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए और अधिक समर्पण के साथ कार्य करें। मंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षकों के मान-सम्मान और हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, वहीं शिक्षकों से भी शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की अपेक्षा है।
शिक्षा मंत्री के इस ऐलान को शिक्षकों और शिक्षा जगत के लिए एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की निगाहें प्रस्तावित सचिवालय बैठक और उससे निकलने वाले फैसलों पर टिकी हैं।