शिक्षा से बनेगा आत्मनिर्भर बिहार : एजुकेशन कॉन्क्लेव में स्पीकर प्रेम कुमार का बड़ा संदेश, 20 साल में बदली शिक्षा की तस्वीर
उन्होंने कहा कि एक दौर था जब बिहार शिक्षा के मामले में पिछड़ापन झेल रहा था स्कूलों की कमी, शिक्षकों का अभाव और बुनियादी सुविधाओं की दिक्कतें आम थीं। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।
बजट में जबरदस्त उछाल, गांव-गांव पहुंची शिक्षा
डॉ. प्रेम कुमार ने बताया कि वर्ष 2005-06 में जहां शिक्षा विभाग का बजट करीब 4,400 करोड़ रुपये था, वहीं अब यह बढ़कर 88 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। यह राज्य के कुल बजट का लगभग 20 प्रतिशत है, जो सरकार की प्राथमिकता को साफ दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि अब गांव-गांव तक स्कूल पहुंच चुके हैं, जिससे बच्चों को पढ़ाई के लिए दूर नहीं जाना पड़ता। साथ ही, लाखों शिक्षकों की नियुक्ति और उनके प्रशिक्षण ने शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाई दी है।
बेटियों ने रचा इतिहास, योजनाओं का दिखा असर
कॉन्क्लेव में उन्होंने खास तौर पर लड़कियों की शिक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि साइकिल योजना और कन्या उत्थान योजना जैसी पहल ने बेटियों की पढ़ाई में क्रांतिकारी बदलाव लाया है।
हालिया बोर्ड परीक्षाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि मैट्रिक और इंटर के टॉपर्स में बेटियों का दबदबा दिखा है, जो बिहार के बदलते सामाजिक और शैक्षणिक माहौल का संकेत है।
‘उन्नत शिक्षा- उज्ज्वल भविष्य’ की दिशा में बड़ा प्लान
डॉ. प्रेम कुमार ने ‘सात निश्चय-3’ के तहत हर प्रखंड में आदर्श विद्यालय और एक आधुनिक एजुकेशन सिटी बनाने की योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इससे बिहार शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान बनाएगा।
शिक्षा को आंदोलन बनाने की अपील
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि शिक्षा को सिर्फ एक व्यवस्था नहीं, बल्कि जन-आंदोलन बनाया जाए- ताकि हर बच्चे तक ज्ञान का प्रकाश पहुंचे और बिहार ज्ञान, कौशल और नवाचार की धरती बन सके।
कॉन्क्लेव में कई शिक्षाविद, मंत्री और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे, जहां शिक्षा के भविष्य पर व्यापक चर्चा हुई।