बिहार में मतदाता सूची पर चुनाव आयोग का जन-सम्बोधन, हर नागरिक से पूछे पांच सीधे सवाल

 

बिहार में मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा (SIR) को लेकर उठ रहे सवाल-जवाब और राजनीतिक घमासान के बीच मंगलवार को चुनाव आयोग ने सीधे जनता की अदालत का दरवाज़ा खटखटाया है। आयोग ने देश के हर नागरिक से पांच अहम सवाल पूछे हैं और इस विशेष पुनरीक्षण कार्य में सहयोग की अपील की है।

आयोग का कहना है कि उद्देश्य सिर्फ इतना है कि मतदाता सूची पूरी तरह से शुद्ध, पारदर्शी और विश्वसनीय बने, ताकि आने वाले चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से कराए जा सकें।

चुनाव आयोग के पाँच सवाल

आयोग ने मतदाताओं के सामने यह पाँच सीधे सवाल रखे हैं:
    1.    क्या मतदाता सूची की गहन जाँच होनी चाहिए?
    2.    क्या दिवंगत लोगों के नाम हटाए जाने चाहिए?
    3.    जिनके नाम एक से अधिक जगह दर्ज हैं, क्या उनका नाम सिर्फ एक ही जगह होना चाहिए?
    4.    जो लोग स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके हैं, क्या उनके नाम हटने चाहिए?
    5.    क्या मतदाता सूची से विदेशियों के नाम हटाए जाने चाहिए?

आयोग ने कहा है कि यदि आपका उत्तर “हाँ” है तो इस कठिन लेकिन ज़रूरी कार्य में सहयोग दें।

छह महीने में 4719 बैठकें

चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, सूची की सफाई और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पिछले छह महीनों में अभूतपूर्व प्रयास किए गए हैं। उप-मंडल स्तर से लेकर राज्य स्तर तक 4719 बैठकें राजनीतिक दलों के साथ आयोजित की गईं, जिनमें करीब 28,000 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

इन बैठकों में मुख्य चुनाव अधिकारियों ने 40, जिला निर्वाचन अधिकारियों ने 800 और मतदाता-पंजीयन अधिकारियों ने 3879 बैठकें कीं। आयोग का कहना है कि यह संवाद प्रक्रिया सूची को बेहतर बनाने में बड़ी भूमिका निभा रही है।

आपत्तियों में सिर्फ 10 दावे मिले

दिलचस्प बात यह है कि 25 अगस्त की सुबह तक आयोग को राजनीतिक दलों की ओर से प्रारूप नामावली पर महज 10 आपत्तियां ही प्राप्त हुई हैं, और ये सभी आपत्तियां वामपंथी दल CPI(ML) के बीएलओ के माध्यम से आई हैं।

आयोग ने बताया कि इन दावों और आपत्तियों पर प्रक्रिया जारी है और इसकी पूरी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को भी दी जा चुकी है। आयोग ने स्पष्ट किया कि योग्य मतदाताओं को शामिल करने और अपात्र नाम हटाने का मौका अब सिर्फ पाँच दिन बाकी है, लेकिन ज़्यादातर दल अब तक चुप्पी साधे हुए हैं।