50 करोड़ से ऊपर की हर बड़ी योजना अब ‘जियो-स्पैशियल टेस्ट’ से गुज़रेगी, BIRSAC को मिला अहम रोल
Bihar news: बिहार में अब बड़ी विकास योजनाएं पहले से ज्यादा वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से बनाई जाएंगी। राज्य के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने साफ कर दिया है कि ₹50 करोड़ या उससे अधिक लागत वाली हर अवसंरचना परियोजना के लिए जियो-स्पैशियल तकनीक का इस्तेमाल अनिवार्य होगा। इसके लिए बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (BIRSAC) से तकनीकी अनुमोदन लेना जरूरी होगा।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बुधवार को BIRSAC के कामकाज की समीक्षा बैठक हुई। इस बैठक में विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की सचिव डॉ. प्रतिमा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बैठक में बताया गया कि BIRSAC राज्य में जमीन, संसाधन, सरकारी परिसंपत्तियों की मैपिंग, आपदा प्रबंधन, और गांव स्तर तक डेटा तैयार करने का काम कर रहा है।
मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि अब योजनाएं बनाते समय BIRSAC की जियो-स्पैशियल सेवाओं को शुरुआत से ही शामिल किया जाए। इससे सड़क, पुल, भवन जैसी परियोजनाओं में जमीन, वन क्षेत्र, जल निकासी या तकनीकी अड़चनों की पहचान पहले ही हो सकेगी और बाद में काम अटकने से बचेगा।
सरकार की नई नीति के तहत, ₹50 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं के डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) में जियो-स्पैशियल एनालिटिक्स जोड़ना अनिवार्य होगा। इसके लिए परियोजना लागत का सिर्फ 0.25 प्रतिशत शुल्क देना होगा। इससे BIRSAC को आर्थिक मजबूती मिलेगी और सरकार पर अतिरिक्त बोझ भी नहीं पड़ेगा।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि BISAG-N के सहयोग से एक डिजिटल टूल तैयार किया जा रहा है। यह टूल PM गति शक्ति पोर्टल के डेटा का उपयोग कर योजनाओं की बेहतर प्लानिंग में मदद करेगा और डीपीआर को ज्यादा सटीक बनाएगा।
अधिकारियों ने माना कि इस नई व्यवस्था से काम की दोहराव रुकेगी, खर्च कम होगा और परियोजनाएं समय पर पूरी होंगी। साथ ही यह सिस्टम आपदा प्रबंधन और पराली जलाने जैसी गतिविधियों की निगरानी में भी कारगर साबित होगा।
मुख्य सचिव ने सभी विभागों को पोर्टल पर योजनाओं की प्रगति नियमित रूप से अपडेट करने और आपसी समन्वय मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने BIRSAC के काम की सराहना करते हुए इसे तकनीकी और मानव संसाधन के स्तर पर और मजबूत बनाने पर जोर दिया।