पिता-बेटी की जोड़ी ने रचा इतिहास: बेटी ने जीते तीन मेडल, पिता ने भी दिलाया सिल्वर; आरा का बढ़ाया मान

 

 

Bihar news: बिहार के भोजपुर जिले के जगदीशपुर से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां पिता और बेटी ने एक साथ निशानेबाजी प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। 1857 के महानायक वीर कुंवर सिंह के वंशज कुंवर अभिजीत सिंह (अंशी सिंह) और उनकी बेटी पलक सिंह ने अपनी सटीक निशानेबाजी से चार पदक जीतकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

पलक सिंह ने प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक, 25 मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल में रजत पदक और 10 मीटर विमेंस पिस्टल में भी रजत पदक अपने नाम किया। वहीं उनके पिता कुंवर अभिजीत सिंह ने 10 मीटर मेन्स पिस्टल स्पर्धा में रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

पलक की यह सफलता और भी खास इसलिए है क्योंकि उनका चयन पिछले वर्ष राष्ट्रीय निशानेबाजी चैंपियनशिप के लिए भी हो चुका है। महज 15 महीनों की ट्रेनिंग में उन्होंने पांच पदक जीतकर अपनी प्रतिभा साबित कर दी है।

कुंवर अभिजीत सिंह स्वयं भी एक अनुभवी निशानेबाज हैं। उन्होंने वर्ष 2003 में दिल्ली स्टेट राइफल शूटिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। अब वे अपनी बेटी को घर पर ही प्रशिक्षण देकर उसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि निशानेबाजी केवल शारीरिक क्षमता का खेल नहीं, बल्कि धैर्य, मानसिक एकाग्रता और अनुशासन की परीक्षा भी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि इतनी कम अवधि में उनकी बेटी इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल कर लेगी। उनका सपना है कि पलक भारतीय टीम का हिस्सा बने और एक दिन ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक जीते।

वहीं पलक सिंह ने कहा कि उनके पिता ही उनके पहले और सबसे बड़े कोच हैं। पढ़ाई के साथ वह नियमित रूप से सुबह-शाम अभ्यास करती हैं। उनका लक्ष्य ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए स्वर्ण पदक जीतना और अपने पिता का सपना पूरा करना है।

पलक की इस उपलब्धि से प्रभावित होकर बिहार सरकार के योजना एवं विकास मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा भी उनके घर पहुंचे थे। उन्होंने पलक को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की।

पदक जीतकर लौटने के बाद पलक सिंह और उनके पिता को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने दोनों को सम्मानित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। पिता-बेटी की यह सफलता न केवल जगदीशपुर बल्कि पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय बन गई है।