बिहार में CO-राजस्व अधिकारियों की हड़ताल पर सरकार सख्त, रिपोर्ट तलब; 5 अफसरों के इस्तीफे मंजूर

 
Bihar News: बिहार में अंचलाधिकारी और राजस्व अधिकारियों की हड़ताल अब बड़ा प्रशासनिक मुद्दा बनती जा रही है। हड़ताल के चलते जमीन से जुड़े काम और कई जरूरी प्रमाणपत्र सेवाएं प्रभावित हो गई हैं, जिससे आम लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए हड़ताल पर गए अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।

तीसरे दिन भी बड़ी संख्या में अधिकारी हड़ताल पर डटे रहे, जिसके कारण राज्य के कई अंचल कार्यालयों में कामकाज लगभग ठप रहा। हालात को देखते हुए बिहार रेवन्यू एंड लैंड रिफार्म्स डिपार्टमेंट ने प्रशासनिक स्तर पर व्यापक जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

जिलों से मांगी गई पूरी रिपोर्ट

विभाग की ओर से भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय, भू-अर्जन निदेशालय और चकबंदी निदेशालय के निदेशकों के साथ-साथ सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि नौ मार्च से शुरू हुई हड़ताल के दौरान कितने अधिकारी अपने कार्यस्थल पर मौजूद रहे और कितने हड़ताल में शामिल हैं, इसकी पूरी जानकारी निर्धारित प्रपत्र में भेजी जाए।

इसके अलावा यह भी पूछा गया है कि दो फरवरी से अब तक किन-किन अंचलों में कामकाज प्रभावित रहा। सरकार इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति तय करेगी और जरूरत पड़ने पर हड़ताल पर गए अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी कर सकती है।

पांच अधिकारियों के इस्तीफे मंजूर

इसी बीच प्रशासनिक सख्ती का संकेत उस समय भी मिला जब बिहार के उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बिहार राजस्व सेवा के पांच अधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए।

इन अधिकारियों में वैशाली जिले के गोरौल के तत्कालीन अंचलाधिकारी अंशु कुमार, रोहतास के बिक्रमगंज के राजस्व अधिकारी राजन कुमार, सारण के परसा की राजस्व अधिकारी शिवांगी पांडेय, रोहतास के राजपुर की अंचलाधिकारी अंकिता वर्मा और हाजीपुर सदर की राजस्व अधिकारी स्मृति कुमारी शामिल हैं। इनके त्यागपत्र को अलग-अलग तिथियों से प्रभावी मानते हुए मंजूरी दे दी गई है।

सरकार की चेतावनी

इससे पहले विभाग के 100 दिन पूरे होने पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विजय कुमार सिन्हा ने हड़ताल पर गए अधिकारियों को साफ संदेश दिया था। उन्होंने कहा था कि जो अधिकारी ड्यूटी से गैरहाजिर हैं, उनके अनुपस्थित दिनों का हिसाब रखा जा रहा है। यदि कोई अधिकारी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाता है तो उसके खिलाफ सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई की जा सकती है।

सरकार का स्पष्ट कहना है कि प्रशासनिक कामकाज बाधित करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और नियमों के तहत सख्त कदम उठाए जाएंगे।