8वें पोषण पखवाड़ा को लेकर सरकार अलर्ट: बच्चों के दिमागी विकास से स्क्रीन टाइम तक, हर पहलू पर बनेगी रणनीति
बैठक में स्पष्ट किया गया कि इस बार फोकस सिर्फ कुपोषण दूर करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बच्चों के शुरुआती 6 वर्षों में शारीरिक के साथ-साथ मानसिक विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। खेलकूद आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने, बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम को कम करने और आंगनबाड़ी केंद्रों को मजबूत बनाने जैसे मुद्दों को अभियान का अहम हिस्सा बनाया गया है।
सचिव ने कहा कि स्तनपान, पूरक आहार और सही पोषण व्यवहार को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य में ठोस सुधार लाया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि बिहार पहले ही पोषण माह में देश में पहला और पोषण पखवाड़ा में चौथा स्थान हासिल कर चुका है, ऐसे में इस बार प्रदर्शन को और बेहतर करने का लक्ष्य रखा गया है।
बैठक में सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और योजनाओं को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए। खास तौर पर आंगनबाड़ी सेविकाओं की भूमिका को अहम बताते हुए उन्हें अधिक संवेदनशील और प्रशिक्षित बनाने पर जोर दिया गया।
सरकार का मानना है कि पोषण से जुड़ी इस लड़ाई में सिर्फ सरकारी प्रयास काफी नहीं हैं, बल्कि परिवार और समाज की भागीदारी भी जरूरी है। यही वजह है कि इस बार पुरुषों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया है। इस बार का पोषण पखवाड़ा सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि बच्चों के बेहतर भविष्य की मजबूत नींव रखने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।