गर्मी से पहले सिंचाई परियोजनाओं पर ‘वॉर मोड’ में सरकार: मुख्य सचिव की सख्त समीक्षा, धीमे पैकेजों पर बढ़ेगी मैनपावर
• शेष भूमि अधिग्रहण अप्रैल–मई तक पूरा करने का लक्ष्य
• मार्च अंत तक नार्थ कोयल का 60% काम पूरा करने का दावा
सूखाग्रस्त इलाकों के लिए अहम है नार्थ कोयल
बैठक में बताया गया कि 162 किलोमीटर लंबी नार्थ कोयल जलाशय परियोजना औरंगाबाद व गया जैसे सूखाग्रस्त जिलों के लिए जीवनरेखा साबित होगी। अब तक करीब 90 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण पूरा हो चुका है। मुख्य सचिव ने औरंगाबाद में 30 अप्रैल तक तथा गया में मई तक शेष अधिग्रहण हर हाल में पूरा करने का लक्ष्य तय किया।
परियोजना से जुड़ी एजेंसी WAPCOS ने भरोसा दिलाया कि मार्च के अंत तक कुल कार्य का 60 प्रतिशत हिस्सा पूरा कर लिया जाएगा।
हालांकि समीक्षा में यह भी सामने आया कि MSR कंस्ट्रक्शन और नियति कंस्ट्रक्शन के जिम्मे पैकेज 8, 9, 10 और 11 की प्रगति अपेक्षा से धीमी है। इस पर मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मैनपावर और मशीनरी बढ़ाकर तय समय सीमा में काम पूरा किया जाए। साथ ही वरीय अधिकारियों को नियमित स्थल निरीक्षण और मॉनिटरिंग के आदेश दिए गए।
मंडई वीयर में संतोषजनक प्रगति
फल्गु नदी पर बन रही मंडई वीयर परियोजना की प्रगति को लेकर बैठक में सकारात्मक तस्वीर सामने आई। जहानाबाद, नालंदा और पटना जिले के कुछ प्रखंडों- मोदनगंज, एकंगरसराय और धनरूआ को सिंचाई सुविधा देने वाली इस परियोजना का 73 प्रतिशत भौतिक कार्य पूरा हो चुका है।
जिलाधिकारी ने बताया कि मजदूरों, भुगतान और मशीनरी से जुड़ी कोई बड़ी समस्या नहीं है और रैयतों को मुआवजा भी समय पर दिया जा रहा है, जिससे काम की गति बनी हुई है।
अधिकारियों की मौजूदगी
बैठक में जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष मल्ल, योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी, वित्त विभाग के सचिव (संसाधन) जय सिंह सहित गया, औरंगाबाद और जहानाबाद के जिलाधिकारी मौजूद रहे। संबंधित एजेंसियों और WAPCOS के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भी प्रस्तुतीकरण दिया।
सरकार का स्पष्ट संदेश है सिंचाई परियोजनाएं सिर्फ फाइलों में नहीं, खेतों तक पहुंचनी चाहिए। अब देखना यह होगा कि तय समयसीमा के भीतर ये महत्वाकांक्षी योजनाएं किसानों को राहत दे पाती हैं या नहीं।