बालू घाट छोड़कर भागने वालों पर सरकार की बड़ी कार्रवाई, 78 कंपनियां होंगी ब्लैकलिस्ट
यह जानकारी बिहार के उपमुख्यमंत्री और खान एवं भूतत्व मंत्री विजय कुमार सिंहा ने पटना में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दी। उन्होंने कहा कि कई कंपनियों ने पिछले साल की तुलना में तीन से चार गुना अधिक बोली लगाकर बालू घाटों का ठेका लिया था, लेकिन बाद में घाटों को यह कहकर सरेंडर कर दिया कि उन्हें मुनाफा नहीं हो रहा।
मंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में बालू माफियाओं की मिलीभगत भी सामने आई है। हालांकि विभाग की सख्ती के कारण अवैध खनन के मंसूबे सफल नहीं हो सके। ऐसे में अब घाट छोड़ने वाली कंपनियों और उनके मालिकों को भविष्य में किसी भी टेंडर प्रक्रिया में शामिल नहीं होने दिया जाएगा।
घाटों का फिर से होगा टेंडर
सरकार ने जिन बालू घाटों को सरेंडर किया गया है, उनकी समीक्षा करने के लिए जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में जिला टास्क फोर्स को जिम्मेदारी दी है। समीक्षा के बाद इन घाटों की दरों में संशोधन कर दोबारा टेंडर जारी किया जाएगा, ताकि खनन कार्य फिर से शुरू हो सके।
बाहरी राज्यों के वाहनों पर सख्ती
प्रेस वार्ता में मंत्री ने बताया कि दूसरे राज्यों से आने वाले खनिज लदे वाहनों के लिए अब ट्रांजिट पास (टीपी) लेना अनिवार्य होगा। इसके लिए कैबिनेट से भी मंजूरी मिल चुकी है। ऐसे वाहनों को 85 रुपये प्रति घन फीट के हिसाब से शुल्क देना होगा और सीमावर्ती जिलों में सीसीटीवी के जरिए सख्त निगरानी की जाएगी।
राजस्व में लगातार बढ़ोतरी
खान एवं भूतत्व विभाग के अनुसार राज्य में खनन से मिलने वाले राजस्व में लगातार वृद्धि हो रही है। वर्ष 2021-22 में जहां 1600 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 3500 करोड़ रुपये हो गया। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में 3800 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से करीब 3000 करोड़ रुपये अब तक प्राप्त हो चुके हैं।
अवैध खनन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई
मंत्री ने बताया कि अवैध खनन रोकने के लिए राज्यभर में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की जा रही है। अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच 31 हजार से ज्यादा छापेमारी की गई, 1600 एफआईआर दर्ज हुईं और करीब 400 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
इस मौके पर अवैध खनन और ओवरलोडिंग की सूचना देकर कार्रवाई में मदद करने वाले 71 लोगों को “बिहारी योद्धा” के रूप में सम्मानित भी किया गया। उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई।
प्रेस वार्ता के दौरान खान एवं भूतत्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे और विभाग की भविष्य की योजनाओं की जानकारी साझा की गई।