गुरुदेव टैगोर की जयंती पर बिहार विधानसभा में श्रद्धा का संगम, डॉ. प्रेम कुमार ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर विश्व साहित्य के ऐसे महान स्तंभ थे, जिनका योगदान सदियों तक मानवता को दिशा देता रहेगा। उनकी कालजयी कृति गीतांजलि के लिए उन्हें वर्ष 1913 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जिससे वे यह सम्मान पाने वाले पहले गैर-यूरोपीय साहित्यकार बने।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि टैगोर न केवल भारत के राष्ट्रगान जन गण मन के रचयिता थे, बल्कि बांग्लादेश के राष्ट्रगीत आमार शोनार बांग्ला की रचना कर उन्होंने दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूत किया।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि गुरुदेव का व्यक्तित्व बहुआयामी था वे कवि, उपन्यासकार, नाटककार, संगीतकार और महान मानवतावादी थे। उनके रचित रवींद्र संगीत, कहानियां और नाटक आज भी कला और साहित्य के हर क्षेत्र में नई पीढ़ी को प्रेरित कर रहे हैं।
डॉ. प्रेम कुमार ने उनके राष्ट्रवादी विचारों को याद करते हुए कहा कि जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में टैगोर द्वारा ‘नाइटहुड’ की उपाधि लौटाना उनके साहस और देशभक्ति का प्रतीक था।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने कहा कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का जीवन और कृतित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा और उनके विचार मानवता के मार्गदर्शक के रूप में हमेशा जीवित रहेंगे।