बिहार के सरकारी स्कूलों में फिर लौट सकता है शनिवार का हाफ डे, विधान परिषद में उठा मुद्दा; CM सम्राट चौधरी ने दिया बड़ा आश्वासन
Patna: बिहार के सरकारी स्कूलों में शनिवार को आधे दिन कक्षाएं संचालित करने की व्यवस्था फिर से लागू किए जाने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। इस मुद्दे को लेकर विधान परिषद में पक्ष और विपक्ष के कई सदस्यों ने सरकार से सवाल किया। मामले पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि शनिवार को हाफ डे स्कूल चलाने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा और एक सप्ताह के भीतर इस पर फैसला लिया जाएगा।
दरअसल, विधान परिषद में एमएलसी नवल किशोर यादव, नीरज कुमार, संजीव सिंह और जीवन कुमार ने शिक्षा विभाग से सवाल किया कि क्या सरकारी स्कूलों में पहले की तरह शनिवार को आधे दिन पढ़ाई की व्यवस्था दोबारा शुरू की जाएगी। सदस्यों ने कहा कि पूर्व में शिक्षा मंत्री की ओर से भी इस व्यवस्था को लागू करने का आश्वासन दिया गया था।
नई शिक्षा नीति का दिया गया हवाला
विधान पार्षदों ने नई शिक्षा नीति के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि बिहार में जब नई शिक्षा नीति लागू है, तो उसके अनुरूप स्कूलों के संचालन की व्यवस्था भी की जानी चाहिए। सदस्यों के मुताबिक, तय दिशा-निर्देशों के अनुसार सोमवार से शुक्रवार तक करीब पांच से साढ़े पांच घंटे तक कक्षाएं संचालित होनी चाहिए, जबकि बिहार के सरकारी स्कूलों में फिलहाल लगभग साढ़े छह घंटे तक पढ़ाई होती है।
सदस्यों ने सरकार से मांग की कि शिक्षा विभाग के नियमों और निर्धारित प्रावधानों के अनुसार स्कूलों के समय में बदलाव किया जाए। उनका कहना था कि शनिवार को हाफ डे की व्यवस्था होने से छात्रों और शिक्षकों दोनों को राहत मिल सकती है।
महीने में दो शनिवार स्कूल बंद रखने का प्रावधान
विधान परिषद में चर्चा के दौरान यह भी बताया गया कि प्रावधान के तहत महीने के दो शनिवार को दो से ढाई घंटे तक कक्षाएं संचालित करने और बाकी दो शनिवार को स्कूल बंद रखने की व्यवस्था है। हालांकि, सरकार की ओर से शुरुआती जवाब में कहा गया कि फिलहाल शनिवार को हाफ डे लागू करने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
इसके बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सरकार इस विषय पर जल्द विचार करेगी और सात दिनों के भीतर शनिवार को आधे दिन स्कूल संचालित करने को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री के इस आश्वासन के बाद अब सरकारी स्कूलों के शिक्षक, छात्र और अभिभावक सरकार के अगले फैसले का इंतजार कर रहे हैं।