बिहार में ‘आधी आबादी’ का दम: पंचायतों में महिला नेतृत्व ने बदली गांवों की तस्वीर, सशक्तिकरण की नई मिसाल

    •    Nitish Kumar की नीतियों से पंचायतों में महिलाओं की मजबूत भागीदारी
    •    2021 के पंचायत चुनाव में महिला प्रतिनिधियों ने रचा नया इतिहास
 
Bihar News: बिहार में महिलाओं को नेतृत्व का मौका मिला तो गांवों के विकास की रफ्तार भी तेज हो गई। कभी घर की चारदीवारी तक सीमित मानी जाने वाली महिलाएं आज पंचायतों की कमान संभालकर बदलाव की नई कहानी लिख रही हैं। ग्रामीण शासन व्यवस्था में उनका बढ़ता दखल न सिर्फ सामाजिक सोच को बदल रहा है, बल्कि विकास की दिशा भी तय कर रहा है।

दरअसल, नीतीश कुमार सरकार ने वर्ष 2006 में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू किया था। इस फैसले ने बिहार को देश में अलग पहचान दिलाई। इसके बाद 2007 में नगर निकायों में भी महिलाओं को बराबर का अवसर दिया गया। इसका असर 2021 के पंचायत चुनाव में साफ नजर आया, जब बड़ी संख्या में महिलाएं विभिन्न पदों पर जीतकर सामने आईं।

पंचायतों में महिलाओं का बढ़ा दबदबा

2021 के पंचायत चुनाव में मुखिया और सरपंच पदों पर महिलाओं की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से ज्यादा रही। जिला परिषद अध्यक्ष के 38 पदों में से 29 पर महिलाओं ने जीत दर्ज की। पंचायत समिति प्रमुख पदों पर भी महिलाओं का दबदबा रहा, जहां करीब 66 प्रतिशत सीटें महिलाओं के खाते में गईं। वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य जैसे पदों पर भी महिलाओं की भागीदारी आधे से ज्यादा रही।

राज्यभर में करीब एक लाख से अधिक महिलाएं अलग-अलग पंचायत पदों पर निर्वाचित होकर सामने आईं। यह आंकड़ा सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि महिलाओं के बढ़ते आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता की मिसाल बन चुका है।

महिला प्रतिनिधियों से गांवों में बदलाव

पंचायती राज विभाग की ओर से महिला प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण और क्षमता विकास कार्यक्रमों से मजबूत किया जा रहा है। इसका असर यह हुआ कि अब महिला मुखियाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, जल संरक्षण, बाल विवाह रोकथाम और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

कई पंचायतों में महिला नेतृत्व ने सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन लगवाने, स्कूल ड्रॉपआउट कम करने और घरेलू हिंसा के मामलों में हस्तक्षेप जैसे कदम उठाए हैं। इससे गांवों में सामाजिक जागरूकता भी तेजी से बढ़ी है।

सुरक्षा के लिए रोशनी की पहल

शेखपुरा डिस्ट्रिक्ट के अरियारी प्रखंड की कसार पंचायत की मुखिया सुजाता कुमारी ने पंचायत में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। उन्होंने पंचायत के अंधेरे और असुरक्षित स्थानों की पहचान कर वहां ट्यूबलाइट लगवाई और प्रमुख जगहों पर महिला हेल्पलाइन नंबर भी लिखवाए। इससे महिलाओं में सुरक्षा का भरोसा बढ़ा है।

लड़कियों के लिए बना पुस्तकालय

इसी जिले की गागड़ी पंचायत में मुखिया ललिता देवी ने लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पुस्तकालय बनवाया। पंचायत फंड से बने इस पुस्तकालय में अब लड़कियां नियमित पढ़ाई कर रही हैं। उनका अगला लक्ष्य पंचायत में डिजिटल साक्षरता केंद्र शुरू करना है।

योग से गांव में स्वास्थ्य क्रांति

लखीसराय डिस्ट्रिक्ट के नोनगढ़ पंचायत में मुखिया जुली देवी की पहल से गांव की युवा लड़कियां स्वास्थ्य जागरूकता फैला रही हैं। यहां 17-18 साल की छात्राएं रोज सुबह योग सत्र आयोजित करती हैं, जिसमें करीब 100 लोग हिस्सा लेते हैं।

आदर्श पंचायत का मॉडल

समस्तीपुर डिस्ट्रिक्ट के रोसड़ा प्रखंड की मोतीपुर पंचायत को आदर्श मॉडल पंचायत के रूप में जाना जाता है। मुखिया प्रेमा देवी ने जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए अमृत सरोवर, तालाब और वर्षा जल संचयन जैसी कई योजनाएं शुरू कीं।

भोजपुर की ‘पैड वाली मुखिया’

भोजपुर डिस्ट्रिक्ट की दांवा पंचायत की मुखिया सुशुमलता कुशवाहा ने महिलाओं के लिए सैनिटरी पैड बनाने की मशीन लगवाई। ‘संगिनी’ ब्रांड के नाम से तैयार पैड सस्ते दामों पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे महिलाओं को रोजगार भी मिला और मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर जागरूकता भी बढ़ी।

महिला विकास मॉडल बना बिहार

बिहार में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। पुलिस बल में 35 प्रतिशत आरक्षण लागू होने के बाद महिला पुलिसकर्मियों की संख्या में राज्य देश में शीर्ष पर पहुंच गया है। आज राज्य में 30 हजार से अधिक महिला पुलिसकर्मी कार्यरत हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में भी लड़कियों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। महिला साक्षरता दर 2001 के 33 प्रतिशत से बढ़कर अब करीब 74 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वहीं स्कूलों में बालिकाओं का नामांकन भी कई गुना बढ़ा है।

आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर महिलाएं

जीविका जैसी स्वयं सहायता समूह योजना से राज्य की 1 करोड़ 40 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ चुकी हैं। इन समूहों के जरिए महिलाएं न सिर्फ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रही हैं।

कुल मिलाकर, बिहार में पंचायतों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है। यह गांवों के सामाजिक और आर्थिक बदलाव की नई कहानी बन चुकी है, जहां आधी आबादी अब विकास की असली ताकत बनकर उभर रही है।