PMCH विवाद पर स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा बयान: ‘पत्रकारों को रिपोर्टिंग से नहीं रोक सकता कोई’, जिला अस्पतालों को भी मिलेंगी बड़ी जिम्मेदारियां
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि संविधान ने पत्रकारों को जनहित से जुड़े मुद्दों को सामने लाने का अधिकार दिया है। ऐसे में अस्पतालों में जाकर जानकारी जुटाना और स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को जनता तक पहुंचाना उनका दायित्व है। उन्होंने कहा कि यदि किसी पत्रकार के साथ अभद्रता या दुर्व्यवहार की शिकायत सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
इस दौरान मंत्री ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार की नई रणनीति भी साझा की। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि सामान्य बीमारियों और छोटे-बड़े ऑपरेशन के लिए लोगों को पटना नहीं आना पड़े। गॉल ब्लैडर, अपेंडिक्स और अन्य सामान्य सर्जरी जैसी सुविधाएं जिला अस्पतालों में ही उपलब्ध कराई जाएंगी।
निशांत कुमार ने बताया कि सभी सिविल सर्जनों और स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जिन मरीजों का इलाज जिला स्तर पर संभव है, उन्हें वहीं उपचार उपलब्ध कराया जाए। केवल गंभीर और अति जटिल मामलों को ही पीएमसीएच, आईजीआईएमएस और अन्य बड़े चिकित्सा संस्थानों में रेफर किया जाए।
स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, जिला अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों और जूनियर चिकित्सकों को आधुनिक चिकित्सा तकनीकों का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे मरीजों को अपने जिले में ही बेहतर और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सकेगा।
हालांकि उन्होंने माना कि ओपन हार्ट सर्जरी जैसी जटिल चिकित्सा सेवाओं के लिए फिलहाल बड़े अस्पतालों पर निर्भरता बनी रहेगी। लेकिन सरकार की कोशिश है कि अधिक से अधिक स्वास्थ्य सेवाएं जिला स्तर पर विकसित हों, ताकि राजधानी के अस्पतालों पर बढ़ता दबाव कम किया जा सके।
स्वास्थ्य मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और अस्पतालों की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सरकार अब स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और विकेंद्रीकरण के जरिए मरीजों को उनके घर के नजदीक बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है।