किसानों पर असर: केंद्र ने बिहार के मिट्टी जांच प्रस्ताव में 75% कटौती, बढ़ी टेंशन
75% कटौती से बढ़ी चिंता
इस फैसले से करीब 75 फीसदी कटौती हो गई है, जिससे राज्य के कृषि विभाग में हलचल मच गई है। अब विभाग जिलावार नए लक्ष्य तय करने में जुट गया है और जल्द ही संशोधित प्रस्ताव तैयार कर केंद्र को दोबारा भेजने की तैयारी कर रहा है।
हर साल घटता लक्ष्य
पिछले वर्षों के आंकड़े देखें तो मिट्टी जांच के लक्ष्य में लगातार बदलाव हो रहा है।
• 2025-26: 3 लाख नमूने
• 2024-25: 5 लाख नमूने
• 2023-24: 2 लाख नमूने
अब इसे घटाकर 1.5 लाख कर दिया गया है, जबकि बिहार हर साल अपने लक्ष्य को पूरा करता रहा है।
योजना कैसे काम करती है?
यह पूरी प्रक्रिया Rashtriya Krishi Vikas Yojana के तहत चलती है, जिसमें 60% खर्च केंद्र और 40% राज्य सरकार वहन करती है।
किसानों को क्या मिलता है?
मिट्टी जांच के बाद किसानों को डिजिटल सॉयल हेल्थ कार्ड दिया जाता है, जिससे उन्हें यह पता चलता है कि खेत में कौन-कौन से पोषक तत्व कम हैं और किस फसल के लिए कितनी खाद जरूरी है। इससे उत्पादन बढ़ाने और लागत घटाने में मदद मिलती है।
केंद्र की इस कटौती से किसानों को मिलने वाली सुविधा पर असर पड़ सकता है, वहीं राज्य सरकार अब इस फैसले को बदलवाने के लिए नए प्रस्ताव के जरिए कोशिश तेज करने जा रही है।