बिहार में 6 अंचल अधिकारियों पर विभाग का एक्शन, किसी की वेतनवृद्धि रोकी तो किसी पर गठित हुआ आरोप पत्र

बिहार में जमीन से जुड़े मामलों में लापरवाही, वित्तीय अनियमितता और नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सख्त कार्रवाई की है।
 

बिहार में जमीन से जुड़े मामलों में लापरवाही, वित्तीय अनियमितता और नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। विभाग ने अलग-अलग मामलों में छह अंचल अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का आदेश जारी किया है। इनमें किशनगंज, रोहतास, कटिहार और गोपालगंज में तैनात रहे तत्कालीन अंचल अधिकारी शामिल हैं।

इन अधिकारियों पर जाति प्रमाणपत्र जारी करने में अनियमितता, बिना कार्यादेश भुगतान, दाखिल-खारिज में गड़बड़ी, सरकारी जमीन से अतिक्रमण नहीं हटाने और मामलों को लंबे समय तक लंबित रखने जैसे गंभीर आरोप हैं। कार्रवाई के तहत कुछ अधिकारियों की वेतनवृद्धि रोकने का आदेश दिया गया है, जबकि कुछ के खिलाफ आरोप पत्र गठित किया गया है.

सबसे पहले बात किशनगंज के तत्कालीन अंचल अधिकारी ओम प्रकाश भगत की। उन पर पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल नहीं होने के बावजूद एक आरक्षित मुखिया पद पर चुनाव लड़ने की पात्रता से जुड़े मामले में जाति प्रमाणपत्र जारी करने का आरोप है। इस मामले में उनकी दो वेतनवृद्धि रोकने का आदेश दिया गया है। साथ ही संबंधित राजस्व अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश भी दिया गया है।

वहीं, किशनगंज के ही तत्कालीन अंचल अधिकारी निश्चल प्रेम पर बिना कार्यादेश के अग्रिम भुगतान करने और वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे हैं। विभाग ने उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का आदेश दिया है।

रोहतास जिले के अकोढ़ीगोला के तत्कालीन अंचल अधिकारी जितेंद्र कुमार सिंह पर दाखिल-खारिज के मामले में नियमों की अनदेखी करने का आरोप है। आरोप है कि उन्होंने आपत्ति दर्ज करने की तारीख से पहले ही फैसला कर दिया। साथ ही सभी जमाबंदी रैयतों को सूचना दिए बिना और बंटवारे से संबंधित जरूरी साक्ष्य लिए बिना दाखिल-खारिज मंजूर कर दिया। इस मामले में उनकी तीन वेतनवृद्धि रोकने का आदेश दिया गया है।

कटिहार के मनसाही के तत्कालीन सीओ महेश प्रसाद सिंह, जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, पर भूमि सुधार उपसमाहर्ता के आदेश के विपरीत और स्वामित्व से जुड़े मुकदमे के लंबित रहने के दौरान दाखिल-खारिज का मामला मंजूर करने का आरोप है। उनके खिलाफ भी आरोप पत्र गठित किया गया है।

वहीं, गोपालगंज जिले के हथुआ के तत्कालीन सीओ राज नारायण राजा पर दाखिल-खारिज के मामलों को लंबे समय तक लंबित रखने का आरोप है। उनके कार्यकाल में चार मामले एक साल से अधिक समय तक लंबित रहे। बार-बार याद दिलाने के बावजूद उन्होंने इस संबंध में कारण बताओ नोटिस का जवाब भी नहीं दिया। विभाग ने उनकी दो वेतनवृद्धि रोकने का आदेश दिया है।

दरअसल, बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने भ्रष्टाचार और लापरवाही के मामलों में सख्त रुख अपनाया है। उनके निर्देश पर इन छह अंचल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। विभाग पिछले कुछ समय से भ्रष्टाचार और अनियमितता के मामलों में लगातार कार्रवाई कर रहा है। लखीसराय सदर समेत कई अंचलों में गलत जमाबंदी, अवैध कब्जे और दाखिल-खारिज में गड़बड़ी को लेकर भी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है।

मंत्री दिलीप जायसवाल ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी जमीन, राजस्व से जुड़े मामलों और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।