BPSC में UP की श्रद्धा पाण्डेय बनीं स्टेट टॉपर, दूसरे स्थान पर छपरा का शशांक गौरव और पटना का आयुष बिजॉय, सफल हो पाए 2027 अभ्यर्थी
Bihar news: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) 70वीं परीक्षा का रिजल्ट जारी हो गया. टॉप-10 में 5 महिलाएं हैं. उत्तरप्रदेश की श्रद्धा पाण्डेय टॉपर हैं, जबकि शशांक गौरव और आयुष बिजॉय क्रमशः दूसरे स्थान पर रहे. इतना ही नहीं टॉप 100 की लिस्ट में 45 महिलाएं जगह बनाने में कामयाब रहीं. रिजल्ट के साथ मेरिट लिस्ट जारी होने से चयनित अभ्यर्थियों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है.
यूपी के प्रतापगढ़ के रानीगंज क्षेत्र के पचरास गांव की रहनेवाली श्रद्धा पाण्डेय को इसी साल यूपीएससी में सफलता मिली थी और वो असिस्टेंट कमिश्नर वाणिज्य कर बनी थीं, अब बीपीएससी का रिजल्ट आया है तो श्रद्धा पाण्डेय ने टॉप किया है. टॉपर श्रद्धा पाण्डेय के यूपी से होने के कारण बिहार में डोमिसाइल नीति को लेकर बहस फिर तेज हो सकती है. स्थानीय अभ्यर्थी राज्य में डोमिसाइल आरक्षण की मांग लम्बे समय से कर रहे हैं.
बिहार लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष रवि मनुभाई परमार ने परिणाम जारी करते हुए बताया कि कुल 2035 पदों के लिए वैकेंसी निकाली गई थी, जिनमें से 2027 अभ्यर्थी ही सफल हो पाए हैं. आयोग ने कहा कि बड़ी संख्या में वैकेंसी और 5450 इंटरव्यू के कारण रिजल्ट तैयार करने में समय लगा. सफल उम्मीदवारों की नियुक्ति एसडीएम, डीएसपी, राजस्व अधिकारी सहित अन्य पदों पर की जाएगी. आयोग के अनुसार दिव्यांग कोटे के 8 पद खाली रह गए हैं. यह BPSC के इतिहास की सबसे बड़ी वैकेंसी मानी जा रही है. लगभग 4.83 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जबकि 3.28 लाख उम्मीदवार प्रारंभिक परीक्षा में शामिल हुए.
उत्तरप्रदेश की रहने वाली श्रद्धा पाण्डेय ने इस परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान प्राप्त किया है. उन्हें कुल 593 अंक मिले हैं. वहीं छपरा के शशांक गौरव और पटना के आयुष बिजॉय ने 592-592 अंक हासिल किए हैं और दोनों संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर रहे हैं.
आईएएस अधिकारी रहे नवादा के चितरंजन सिंह की भतीजी "सुनिधि कुमारी" का चयन आरक्षी उपाधीक्षक पद के लिए हुआ है. इसी तरह नवादा के मिर्जापुर निवासी सेवानिवृत शिक्षक वीरेंद्र कुमार के पुत्र और औरंगाबाद के एसपी उपेंद्रनाथ वर्मा के छोटे भाई बिकलेश कुमार का चयन प्रोबेशनरी ऑफिसर के पद पर हुआ है. मधुबनी के किसान परिवार से आने वाली और बख्तियारपुर थाना में पदस्थापित दारोगा कृष्णा कुमारी ने नौकरी के साथ पढ़ाई करते हुए महज चार वर्षों में दारोगा से डीएसपी तक का सफर तय कर नई मिसाल पेश की है. उसकी सफलता लाखों युवाओं और खासकर ग्रामीण पृष्ठभूमि की बेटियों के लिए प्रेरणादायक है.
उधर, पूर्वी चंपारण के संग्रामपुर थाना क्षेत्र के भवानीपुर निवासी राजदेव ओझा के पुत्र नितेश भारद्वाज ने 26वीं रैंक प्राप्त कर रूरल डेवलपमेंट ऑफिसर के पद पर चुना गया. वहीं भारतीय रेलवे में ग्रुप डी की नौकरी करते हुए राजू कुशवाहा ने 72वां रैंक लाकर डीएसपी बना. खासकर डीएसपी में पांचवां रैंक है. बगैर कोचिंग के सेल्फ स्टडी करके डीएसपी बनकर कीर्तिमान रचा है. वह राजेश कुमार सुमन का अनुज है.
सनद रहे कि प्रारंभिक परीक्षा 13 दिसंबर 2024 को आयोजित की गई थी. एक केंद्र पर गड़बड़ी के चलते पटना में री-एग्जाम कराया गया, जो 4 जनवरी 2025 को हुआ. प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम 23 जनवरी 2025 को जारी हुआ, जिसमें 21 हजार 581 अभ्यर्थी मेंस परीक्षा के लिए सफल हुए. पटना के बापू परीक्षा परिसर में गड़बड़ी के आरोपों के बाद बड़ा हंगामा हुआ था, जिसके चलते इस केंद्र की परीक्षा दोबारा कराई गई. इसी मुद्दे पर लगभग तीन महीने तक प्रदर्शन भी चला और मामला कोर्ट तक पहुंचा. हालांकि, आयोग ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बताते हुए आगे की चयन प्रक्रिया जारी रखी थी.
मेंस परीक्षा 25 अप्रैल से 30 अप्रैल 2025 के बीच पटना में आयोजित हुई. इस चरण में 5 हजार 449 उम्मीदवार इंटरव्यू के लिए चयनित हुए. आयोग ने बताया कि इंटरव्यू प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए कोड आधारित मूल्यांकन और लॉटरी सिस्टम अपनाया गया. इंटरव्यू में अभ्यर्थियों की पहचान छिपाकर केवल कोड के आधार पर मूल्यांकन किया गया. कुल 5450 उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया गया, जो चयन प्रक्रिया की व्यापकता को दर्शाता है. इस परीक्षा में महिलाओं ने शानदार प्रदर्शन किया है. टॉप 20 में 10 और टॉप 50 में 25 महिलाओं ने जगह बनाई. चयनित 2027 उम्मीदवारों में 1282 पुरुष और 745 महिलाएं शामिल हैं.
दरअसल, कोटे के तहत अनारक्षित वर्ग से 843, ईडब्ल्यूएस से 194, बीसी से 259, ईबीसी से 335, एससी से 316, एसटी से 21, बीसी महिला वर्ग से 59 उम्मीदवार चुने गए हैं. इसके अलावा 61 दिव्यांग और 36 स्वतंत्रता सेनानी आश्रितों का भी चयन हुआ है. आयोग ने कहा है कि पेपर लीक और अनियमितताओं के सभी आरोप बेबुनियाद पाए गए हैं. साथ ही कोर्ट ने भी इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं पाया. आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुसार पूरी की गई.