राजद में बढ़ी अंदरूनी कलह! भाई वीरेंद्र का बड़ा हमला, बोले- ‘जरूरत पड़ी तो कई चेहरे बेनकाब कर दूंगा’
Bihar news: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मिली हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के भीतर सियासी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला लगातार तेज हो रहा है। इसी बीच राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने एक बार फिर अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
मीडिया से बातचीत में भाई वीरेंद्र ने कहा कि उनकी राजनीति का एकमात्र उद्देश्य तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में कुछ लोग तेजस्वी यादव का नाम लेकर लोगों से पैसे वसूलने और मुलाकात कराने का काम कर रहे हैं, जिससे संगठन की छवि लगातार खराब हो रही है।
‘जिंदा चमड़े का सप्लायर’ कहकर कसा तंज
भाई वीरेंद्र ने बिना किसी का नाम लिए अपने विरोधियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग उन पर सवाल उठा रहे हैं, वे पहले अपना इतिहास देखें। उन्होंने एक नेता पर तंज कसते हुए उसे “जिंदा चमड़े का सप्लायर” तक कह दिया। उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
‘मेरे पास कई राज हैं’
राजद विधायक ने दावा किया कि उन्हें पार्टी के कुछ नेताओं के राजनीतिक और निजी जीवन से जुड़ी कई अहम जानकारियां हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उन्हें लगातार निशाना बनाया गया तो वह ऐसे खुलासे करेंगे, जिससे कई नेताओं के चेहरे बेनकाब हो जाएंगे और राजनीति में टिकना मुश्किल हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि जब कई मौजूदा नेता राजनीति में सक्रिय भी नहीं थे, तब से वह राजद के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वर्ष 2010 में जब पार्टी मुश्किल दौर से गुजर रही थी और विधानसभा में केवल 22 विधायक थे, तब भी उन्होंने संगठन का साथ नहीं छोड़ा।
लालू और तेजस्वी के प्रति जताई निष्ठा
भाई वीरेंद्र ने दोहराया कि उनकी निष्ठा केवल लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव के प्रति है। उन्होंने कहा कि वे पार्टी नेतृत्व के भरोसे पर खरे उतरे हैं और आगे भी पूरी ईमानदारी से काम करते रहेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनकी राजनीतिक हैसियत पर सवाल उठाने वाले पहले अपना योगदान देखें।
हार के बाद बढ़ी बयानबाजी
बांकीपुर उपचुनाव में राजद की हार के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व, संगठन और चुनावी रणनीति को लेकर असंतोष के स्वर लगातार सामने आ रहे हैं। नेताओं के सार्वजनिक बयानों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी के भीतर मतभेद गहराते जा रहे हैं। अब यह देखना होगा कि राजद नेतृत्व इस बढ़ती बयानबाजी पर क्या रुख अपनाता है और अंदरूनी विवाद को कैसे संभालता है।