‘जान है तो जहान है’: बिहार में सड़क हादसा पीड़ितों को बड़ा तोहफा, अब ₹1.5 लाख तक मुफ्त इलाज और स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम लागू
सबसे बड़ी राहत सड़क हादसा पीड़ितों को दी गई है। अब राज्य के आपातकालीन ट्रॉमा सेंटर में दुर्घटना के घायलों को ₹1 लाख 50 हजार तक का मुफ्त इलाज मिलेगा। इसका उद्देश्य ‘गोल्डन आवर’ में त्वरित इलाज देकर मौतों की संख्या को कम करना है।
बैठक में परिवहन सचिव राज कुमार ने विभाग की मौजूदा स्थिति और योजनाओं की जानकारी दी। इसके साथ ही ट्रैफिक व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए राज्य के प्रमुख शहरों में इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) लागू करने का फैसला लिया गया है। यह व्यवस्था पीपीपी मॉडल पर आधारित होगी, जिससे ट्रैफिक जाम और नियम उल्लंघन पर तकनीकी निगरानी संभव हो सकेगी।
सड़क हादसों को रोकने के लिए अब दुर्घटनाओं को ‘माइनर’ और ‘मेजर’ श्रेणियों में बांटकर उनके कारणों का गहराई से विश्लेषण किया जाएगा। इसके आधार पर एक मजबूत सड़क सुरक्षा योजना तैयार की जाएगी।
लापरवाह चालकों पर भी अब सख्ती बढ़ेगी। सरकार जिला स्तर पर ड्राइवरों की ट्रैकिंग के लिए विशेष मॉड्यूल तैयार करेगी। खासकर भारी वाहनों (HMV) के चालकों को अनिवार्य ट्रेनिंग लेनी होगी। तीन बार नोटिस के बाद भी ट्रेनिंग में शामिल नहीं होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं 1 मई 2026 से ट्रेनिंग लेने वाले चालकों को ₹100 अल्पाहार और ₹200 प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
इसके अलावा जल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए नदियों से गाद हटाकर उन्हें जलमार्ग के रूप में विकसित करने की योजना पर भी जोर दिया गया।
सरकार ने यह भी तय किया है कि अब हर जिले में पूरे साल ड्राइविंग टेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे लोगों को अपने समय अनुसार टेस्ट देने में आसानी होगी।
यह बैठक बिहार की परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, आधुनिक और जनहितकारी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।