‘अपराध छोड़ो या श्मशान जाओ’! सम्राट चौधरी का सख्त संदेश, सुस्त अफसरों को भी दी अंतिम चेतावनी
मुख्यमंत्री ने अपराधियों को चेतावनी देते हुए कहा कि बिहार में अब उनके लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अपराधियों के सामने सिर्फ दो विकल्प हैं—या तो अपराध का रास्ता छोड़ दें या फिर कानून की कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और किसी भी कीमत पर कानून-व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा।
सम्राट चौधरी ने दावा किया कि पड़ोसी राज्यों में भी अपराधियों के लिए हालात आसान नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अब अपराध करके बच निकलने का दौर खत्म हो चुका है और सरकार अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है।
वहीं, मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों को भी कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं के समाधान में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। “काम कीजिए या घर बैठिए” की चेतावनी देते हुए उन्होंने बताया कि सहयोग शिविरों में आने वाले आवेदनों के निपटारे में देरी करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हजारों अधिकारियों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। नई व्यवस्था के तहत शिकायत या आवेदन पर तय समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर संबंधित अधिकारी को चरणबद्ध तरीके से नोटिस मिलेगा। लगातार लापरवाही की स्थिति में निलंबन तक की कार्रवाई की जा सकती है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सहयोग शिविरों के माध्यम से अब तक तीन लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें अधिकांश मामलों का निष्पादन किया जा चुका है। उन्होंने इसे जवाबदेह और परिणाम आधारित शासन की दिशा में बड़ा कदम बताया।
इसके साथ ही सम्राट चौधरी ने राज्य के विकास और रोजगार को लेकर भी सरकार की प्राथमिकताएं गिनाईं। उन्होंने कहा कि बिहार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और वर्ष 2030 तक एक करोड़ युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लक्ष्य पर तेजी से काम किया जा रहा है।
राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों मोर्चों पर सख्त तेवर दिखाते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सरकार अब केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि परिणाम और जवाबदेही को प्राथमिकता देने के मूड में है।