‘ज्ञान की विरासत अब डिजिटल’: ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ पर हाई लेवल मीटिंग, 75 साल पुरानी पांडुलिपियों को सहेजने का मिशन तेज
यह बैठक मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी जिलाधिकारियों के साथ हुई, जिसमें मिशन को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के सख्त निर्देश दिए गए।
मिशन मोड में होगा काम
बैठक में साफ कहा गया कि राज्यभर में मौजूद 75 वर्ष से अधिक पुरानी पांडुलिपियों की पहचान, कैटलॉगिंग और डिजिटलीकरण का कार्य प्राथमिकता के आधार पर तेजी से पूरा किया जाए। इसके लिए जिला स्तर पर टीम बनाकर काम को और गति देने पर जोर दिया गया।
मठ-मंदिर से लेकर निजी संग्रह तक फोकस
सरकार ने निर्देश दिया है कि मठ, मंदिर, पुस्तकालय, विश्वविद्यालय और निजी संग्रहकर्ताओं के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर अधिक से अधिक पांडुलिपियों को इस अभियान से जोड़ा जाए, ताकि छिपी हुई बौद्धिक विरासत भी सामने आ सके।
कागज से डिजिटल तक का सफर
इस मिशन के तहत कागज, भोजपत्र, ताड़पत्र, कपड़े और धातु पर लिखी प्राचीन पांडुलिपियों को सुरक्षित कर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी इस ज्ञान को आसानी से समझ और उपयोग कर सकें।
जागरूकता पर भी जोर
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ को लेकर व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि आम लोग भी अपने पास मौजूद पांडुलिपियों की जानकारी साझा कर सकें।
यह पहल बिहार की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और उसे वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।