बिहार के विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव, लोकभवन ने चार विवि के लिए जारी विज्ञापनों को किया रद्द, आखिर क्यों?

 

Patna: बिहार के विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है. लोकभवन ने राज्य के चार प्रमुख विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापनों को रद्द कर दिया है. इस फैसले के बाद उच्च शिक्षा व्यवस्था में नई नियुक्ति नीति और गाइडलाइन लागू होने की चर्चा तेज हो गई है. इसे राज्य के विश्वविद्यालय प्रशासन और शैक्षणिक सुधारों की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. राज्यपाल सचिवालय ने ललित नारायण मिश्रा मिथिला विश्वविद्यालय (दरभंगा), कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगा, बीएन मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा, बीबीए बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर, जेपी विश्वविद्यालय छपरा और आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय पटना के लिए आवेदन आमंत्रित किये हैं.

बताया जाता है कि अब कुलपतियों के चयन के लिए राज्य में नई गाइडलाइन लागू की गई है, जिसके तहत प्रोफेसरों और शिक्षाविदों को प्राथमिकता दी जाएगी, शिक्षा से जुड़े नीतिगत नियम बदले जाएंगे और पुराने विज्ञापनों को रद्द कर दिया गया है. लोकभवन (मुख्यमंत्री सचिवालय) और राजभवन के बीच उच्च स्तरीय चर्चा के बाद पुरानी नियुक्तियों और विज्ञापनों (जो 2025 में जारी हुए थे) को रद्द कर दिया गया है.

अब नए सिरे से गाइडलाइन बनाकर नियुक्तियां की जा रही हैं. कुलपति पद के लिए आवेदक का किसी विश्वविद्यालय प्रणाली में प्रोफेसर के रूप में कम से कम 10 वर्ष का अनुभव अनिवार्य है. इसके साथ ही उम्मीदवार की अधिकतम आयु 67 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए. पारदर्शी प्रक्रिया के लिए खोज-सह-चयन समिति बनाई जाती है जो अकादमिक उत्कृष्टता, नेतृत्व क्षमता और साक्षात्कार के आधार पर 3 से 5 योग्य नामों का पैनल तैयार करती है. प्राप्त जानकारी के अनुसार वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा, मौलाना मजहरूल हक अरबी-फारसी विश्वविद्यालय पटना, मगध विश्वविद्यालय बोधगया और तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में कुलपति नियुक्ति की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी. खासतौर पर मगध विश्वविद्यालय में कुलपति पद के लिए 5 जून को इंटरव्यू प्रस्तावित था. लेकिन इंटरव्यू से पहले ही लोकभवन की ओर से जारी विज्ञापनों को निरस्त कर दिया गया. 

लोकभवन की तरफ से जारी सूचना में "अपरिहार्य कारणों" का हवाला देकर विज्ञापन रद्द करने की बात कही गई है. हालांकि राजनीतिक और शैक्षणिक गलियारों में इसे उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है. सूत्रों के अनुसार हाल ही में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राज्यपाल सैयद अता हसनैन के बीच हुई बैठक में विश्वविद्यालयों की स्थिति पर गंभीर चर्चा हुई थी. इस दौरान कुलपति नियुक्ति प्रक्रिया, विश्वविद्यालयों में सत्रों की देरी, वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें और शिक्षा व्यवस्था में सुधार जैसे कई मुद्दों पर बातचीत हुई थी.

माना जा रहा था कि बैठक के बाद जल्द ही नए कुलपतियों के नामों की घोषणा कर दी जाएगी, लेकिन इसके उलट पूरी प्रक्रिया ही रद्द कर दी गई. अब संकेत मिल रहे हैं कि बिहार में कुलपतियों की नियुक्ति नई गाइडलाइन के तहत की जाएगी. हालांकि लोकभवन या सरकार की ओर से अभी तक आधिकारिक तौर पर नई नीति की विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है. लेकिन माना जा रहा है कि नई व्यवस्था में स्थानीय शिक्षाविदों और अनुभवी अकादमिक विशेषज्ञों को प्राथमिकता दी जा सकती है. लोकभवन ने सरकार से सभी विश्वविद्यालयों के लिए अलग-अलग प्रतिनिधियों के नाम भी मांगे हैं. इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि नियुक्ति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की तैयारी की जा रही है.

इस बीच जब तक नियमित कुलपति नियुक्त नहीं हो जाते, तब तक कार्यवाहक कुलपतियों को नीतिगत निर्णय लेने, नियुक्तियां करने और वित्तीय प्रभाव वाले काम करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. उच्च शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई गाइडलाइन पारदर्शिता और गुणवत्ता को ध्यान में रखकर बनाई गई तो इससे बिहार के विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक स्थिति में सुधार हो सकता है.