बांकीपुर में कम वोटिंग किसके लिए शुभ संकेत? 34.30% मतदान ने बढ़ाया सस्पेंस, अब 3 अगस्त के नतीजों पर नजर
Patna: राजधानी पटना की प्रतिष्ठित बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में इस बार महज 34.30 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार कुल 3,79,616 मतदाताओं में से केवल 1,30,208 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार करीब 26,677 वोट कम पड़े हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कम मतदान का फायदा आखिर किस राजनीतिक दल को मिलेगा।
हालांकि पहली नजर में मतदान प्रतिशत कम दिखता है, लेकिन बांकीपुर का चुनावी इतिहास बताता है कि इस सीट पर हमेशा अपेक्षाकृत कम मतदान होता रहा है। वर्ष 2025 में 40.97 प्रतिशत, 2020 में 35.92 प्रतिशत, 2015 में 40.25 प्रतिशत और 2010 में 36.96 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। यानी यह सीट पारंपरिक रूप से कम मतदान वाली रही है।
बीजेपी के लिए शुभ संकेत या बदलेगा ट्रेंड?
अब तक के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो कम मतदान के बावजूद भारतीय जनता पार्टी ने बांकीपुर सीट पर लगातार जीत दर्ज की है। इसकी बड़ी वजह पार्टी का मजबूत शहरी और संगठित वोट बैंक माना जाता रहा है। कायस्थ, भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत और वैश्य समुदाय के मतदाता लंबे समय से भाजपा के समर्थक माने जाते हैं, जो कम मतदान की स्थिति में भी अपेक्षाकृत अधिक संख्या में वोट डालते रहे हैं।
हालांकि इस बार चुनावी तस्वीर पहले जैसी नहीं दिखी। राजनीतिक हलकों में चर्चा रही कि प्रशांत किशोर की एंट्री ने भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की। ब्राह्मण और राजपूत मतदाताओं के एक हिस्से के जन सुराज की ओर झुकाव की चर्चा रही, जबकि वैश्य समाज का कुछ समर्थन राजद उम्मीदवार के पक्ष में जाने की भी बातें सामने आईं। दूसरी ओर कायस्थ मतदाताओं को भाजपा के साथ मजबूती से खड़ा माना जा रहा है, जबकि कुशवाहा समाज का समर्थन भी भाजपा के पक्ष में रहने की चर्चा रही।
त्रिकोणीय मुकाबले ने बदले समीकरण
इस उपचुनाव में भाजपा, राजद और जन सुराज के बीच मुकाबला त्रिकोणीय बन गया। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने विकास और नई राजनीति को चुनावी मुद्दा बनाया, जबकि भाजपा ने अपने संगठन और बूथ प्रबंधन पर भरोसा जताया। वहीं राजद ने अपने पारंपरिक सामाजिक समीकरण के सहारे चुनावी मुकाबले में बढ़त बनाने की कोशिश की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार केवल कम मतदान के आधार पर किसी एक दल को बढ़त देना जल्दबाजी होगी। असली तस्वीर इस बात से तय होगी कि जो करीब 26 हजार मतदाता इस बार वोट डालने नहीं पहुंचे, वे किस सामाजिक और राजनीतिक वर्ग से जुड़े थे।
एग्जिट आकलन में भाजपा आगे, लेकिन मुकाबला रोचक
चुनावी विश्लेषणों में भाजपा को अभी भी बढ़त की स्थिति में माना जा रहा है, हालांकि जीत का अंतर पहले की तुलना में कम रहने की संभावना जताई जा रही है। वहीं जन सुराज ने कई सामाजिक वर्गों में अपनी उपस्थिति दर्ज कर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। राजद भी अपने पारंपरिक वोट बैंक के भरोसे परिणाम का इंतजार कर रहा है।
अब सभी की निगाहें 3 अगस्त को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं। उसी दिन साफ होगा कि कम मतदान का गणित किसके पक्ष में गया और बांकीपुर की जनता ने आखिर किसे अपना नया जनप्रतिनिधि चुना।