पितृपक्ष में विष्णुपद पर विद्वानों का महासंगम! गया जी की सनातन परंपरा पर हुआ बड़ा मंथन

Gayaji:  पितृपक्ष मेला 2026 के अवसर पर ऐतिहासिक विष्णुपद प्रांगण में जिला प्रशासन के तत्वावधान में भव्य विद्वत संगोष्ठी आयोजित की गई. वैदिक मंगलाचरण से शुरू हुए कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे संतों, साहित्यकारों और विद्वानों ने हिस्सा लिया. संगोष्ठी में पितृपक्ष की शास्त्रीय एवं आध्यात्मिक महत्ता, गया जी के पितृतीर्थ स्वरूप, पिंडदान-तर्पण की परंपरा और सनातन संस्कृति में पितृऋण की अवधारणा पर विचार रखे गए.
 

गया से धीरज सिन्हा की रिपोर्ट 

Gayaji:  पितृपक्ष मेला 2026 के अवसर पर गया जी के ऐतिहासिक एवं पवित्र विष्णुपद प्रांगण में जिला प्रशासन के तत्वावधान में भव्य विद्वत संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संयोजन वरिष्ठ समाजसेवी एवं धर्मप्रेमी श्रीमती उषा देवी डालमिया ने किया। संगोष्ठी की अध्यक्षता रामानुज मठ के महंत स्वामी वेंकटेशप्रपन्नाचार्य ने की।

कार्यक्रम का शुभारंभ रामानुज मठ के छात्रों द्वारा वैदिक मंगलाचरण एवं मंगलाचरण पाठ के साथ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार से विष्णुपद प्रांगण का वातावरण आध्यात्मिक और भक्तिमय हो उठा। इसके बाद विद्वत संगोष्ठी का विधिवत शुभारंभ किया गया।

देशभर से पहुंचे संत और विद्वान

संगोष्ठी में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए संतों, साहित्यकारों और विद्वानों ने हिस्सा लिया। गया के वरिष्ठ साहित्यकार सच्चिदानंद प्रेमी के अलावा बीकानेर से पहुंचे लक्ष्मण आचार्य, राजूरंजन मिश्र, ब्रजेंद्र मिश्र, अवध बिहारी मिश्र, नंद किशोर मिश्र, अशोक दुबे और अरुण शास्त्री सहित कई विद्वानों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

संगोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने पितृपक्ष की शास्त्रीय एवं आध्यात्मिक महत्ता, गया जी के पितृतीर्थ स्वरूप, पिंडदान और तर्पण की परंपरा तथा सनातन संस्कृति में पितृऋण की अवधारणा पर विस्तार से विचार रखे।

पितृऋण और गया जी की परंपरा पर चर्चा

विद्वानों ने कहा कि गया जी की महत्ता केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है। भारतीय सनातन परंपरा में यह स्थान श्रद्धा, कर्तव्य, स्मृति और पीढ़ियों के बीच आध्यात्मिक संबंध का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।

वक्ताओं ने पितृपक्ष के दौरान किए जाने वाले पिंडदान और तर्पण की परंपरा के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक पक्ष पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसी परंपराएं नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और विरासत से जोड़ने का माध्यम हैं।

विद्वानों और अतिथियों का किया गया सम्मान

इस अवसर पर बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के सदस्य चंदन कुमार द्वारा उपस्थित विद्वानों और अतिथियों का सम्मान किया गया। उन्होंने कहा कि गया जी की सनातन आध्यात्मिक परंपरा को देश-दुनिया तक पहुंचाने में विद्वत समाज की भूमिका महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन धार्मिक चेतना को मजबूत करने के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी योगदान देते हैं।

आयोजन की हुई सराहना

कार्यक्रम की संयोजक श्रीमती उषा देवी डालमिया के प्रयासों की उपस्थित विद्वानों और अतिथियों ने सराहना की। वैदिक मंगलाचरण, संतों के प्रवचन और विद्वानों के विचारों से विष्णुपद प्रांगण का वातावरण आध्यात्मिक, ज्ञानमय और संस्कृतिमय बना रहा।

पितृपक्ष मेला 2026 के अवसर पर आयोजित इस संगोष्ठी के माध्यम से गया जी की प्राचीन पितृपरंपरा, सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।